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क्या करें क्या न करें.....

आज आदि की स्कुल का चौथा दिन था... सुबह साढ़े छह बजे ही उठ गया.. अच्छे मुड में था.. आराम से खेल रहा था.. मीठी मीठी बातें कर रहा था... बड़े प्यार से तैयार हो गया.. अपनी पसंद के जुते भी पहन घर से बाहर आ गया..  अचानक पता नहीं क्या हुआ.. बोलने लगा "आदि स्कुल नहीं जाएगा..."  सोचा कुछ देर में ठीक हो जाएगा.. इतने में लिफ्ट आ गई.. और आदि रोने लगा... अनसुना कर आदि को लिफ्ट में ले गया.. लिफ्ट से निकल कर टेक्सी मे... इधर उधर की बातें की.. थोड़ा मन लगा.. पर थोड़ी थोड़ी देर में स्कुल नहीं जाने की बात दोहराता रहा..

बहलाते फुसलाते स्कुल भी पहुँच गए... आदि का रोना बढ़ गया... समझ नहीं आ रहा क्या किया जाए.. अनमने भाव से स्कुल में दाखिल हो गया... उसका प्यारा जेबरा दिखाया पर.. आज आदि को जेबरा  भी खुश नहीं कर पाया....  बोलने लगा "आदि स्कुल नहीं जाएगा...घर पर रहेगा" "फिर कुछ खिलौने दिख गए...  उन्हें लेकर मिटटी के अलग अलग आकार बनाए... आदि थोडा खुश हुआ... थोड़ी देर में टिचर आ गई.. उन्हें देख आदि फिर बिदक गया... टिचर ने गोदी में उठाया तो आदि का रोना शुरू हो गया... मैं पास असमंझस की स्तिथि में खडा रहा.. टिचर बोली.."He was much better yesterday, you go we will take care"
अच्छे मुड में आदि का डांस....

आदि को रोता छोड़ कैसे घर चला जाता.. स्कुल के गेट पर ही खडा हो गया.. कभी लगता आदि को घर ले जाऊं.. स्कुल तो होता रहेगा... फिर सोचता अगर घर ले गया तो आदि को लगेगा की रोने से स्कुल की छुट्टी होती है... शायद हमेशा ऐसा करे.. खडा रहा... थोड़ी देर में रोने की आवाज बंद हो गई.. अंदर जा कर देखने की इच्छा हुई पर.. मुझे देखा तो फिर रो पडेगा... स्कुल की मैड को अंदर भेजा... वो बोली अब चुप हो गया है... मन तो नहीं था फिर भी वापस चला... कुछ कदम चला तो फिर आदि के रोने की आवाज आई.. और कदम स्वत: ही स्कुल की और बढ़ गए... गेट से झांका तो देखा आदि अभी भी टिचर की गोदी में रो रहा है.. बाकी बच्चे वका-वका पर डांस कर रहे है..  कुछ देर खडा रहा.. आदि चुप हो चुका था... और नए माहोल में खुद को ढाल रहा था...

भारी मन से ऑफिस की और चल दिया... ये सोचते की मैंने सही किया या गलत...  किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाया....

करीब एक घंटे बाद अंजु ने स्कुल में फोन किया.. पता चला आदि मजे में है.. थोड़ा रोया फिर खेलने लग गया... कुछ खाना भी खाया... करीब ११ बजे अंजु आदि को घर ले आई. आदि बहुत खुश था... मैंने जब ११.३० बजे घर फोन किया तो आदि ने पेरेलल लाइन से फोन उठा लिया..  बोला "बाबा आप कब घर आओगे?" आदि चहचहा रहा था.. और मैं बेहतर महसूस कर रहा था....
13 comments:

Comments

स्कूल में जब कई दोस्त बन जायेंगे तो हालत सुधर जायेंगे फिर देखना छुट्टी वाले दिन भी स्कूल जाने की जिद करेगा |


@आदि आपके पापा नें बिलकुल ठीक किया! स्कूल नहीं जाना बुरी बात !


आपकी दुविधा समझ सकता हूं. यह socialization की पहली सीढ़ी है. धीरे-धीरे नए माहौल को भी आदित्य अपना लेगा. "स्कूल में आज क्या-क्या मज़े किये ?" जैसे छोटे-छोटे एक-आध सवाल बच्चे को घर और स्कूल को एक साथ जोड़ कर देखने में मदद करते हैं.


अरे मन को मजबुत करो जी, हम पर सब बीता है, आप ने सही किया वर्ना उस को रोज क बहाना मिल जाता ओर रोज ही किसी ना किसी बहाने रोता, अभी तो स्कुल जायेगा, फ़िर दोस्तो के संग एक दो दिन के लिये घर से बाहर, फ़िर स्कुल के संग एक दो सप्ताह के लिये घर से बाहर... अब आदि को थोडा आजाद होने दो यह उस के लिये ही अच्छा हैमै पहले पहल रात को सोता भी नही था, अगर आदि को मजबुत बनाना है तो पहले अपने दिल को मजबुत बनाओ .
ऎसे ही हमारे मां बाप ने हमे पाला है, ओर वो आज भी हमारे लिये युही तडपते है


@रतन जी,

उस दिन का इंतज़ार है... मजा आएगा.. छुट्टी के दिन आदि को स्कुल जा कर दिखायेगें देखो कोई नहीं है..:)


@ काजल भाई, प्रयास जारी है.. हम स्कुल में ज्यादा समय बिताते है और जाते समय बता कर निकलते हैं की थोड़ी देर में आते है..

थैंक्स


@ भाटिया जी,

उसी मजबूत दिल से आज आदि को छोड़ आया.. वरना..

आपकी बातें हमेशा मार्गदर्शन करती है...

थैंक्स...


sounds touching...these small small things make the the quality of our life pricious..


विद्यालय जाने में कोई समझौता नहीं, आदि महाराज।


मेरी मम्मी कहती है कि मै शुरु से ही नालायक था... स्कूल जाते समय रोता नही था :( मैम लोगो के साथ खुश रहता था :(

आदि को ढेर सारा प्यार... जल्दी ही वो अपना गैन्ग बनाये और उसके सारे दोस्तो की फ़ोटो देखने को मिले..


ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ था, पर अब तो मन से स्कूल जाती हूँ.


अब तो मेरा मन भी होने लगा है कि
मैं भी "सरस पायस" से संबंधित संस्मरण लिखने लगूँ!


आपने सही किया
आदि को शुभकामनाये


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