"बाबा कब आओगे? सुनो.. आप घोड़े पर ले जाओगे"...आदि प्यार से फोन पर बोला था... पता नहीं था की वो किसे घोड़ा बनाने वाला है.... अगले दिन (मंगलवार २० अप्रैल) शाम को आदि ने आवाज लगाईं..."बाबा नीचे आओ, आदि घोड़े पर बैठेगा!!" तो समझ आया.. की घोड़ा कौन बनाने वाला है..
घोड़ा तबडिक तबडिक चलता है...
चल मेरे घोड़े टिक टिक टिक..
April 28, 2010 at 6:58 PM
थोड़ा सा चाबुक लगाओ बबुआ.घोड़ा टेढ़ा चल रहा है. :)
मजा आया घोड़ा और सवार...दोनो को देखकर.
April 28, 2010 at 7:03 PM
अरे आदि ! घोड़े की नाक में लगाम लगावो और हाथ में चाबुक भी रखों न जाने कब घोडा बिदक जाये :)
April 28, 2010 at 8:23 PM
आदि बेटा बहुत सहि जा रहे हो. और लगता है ताऊ के असली उतराधिकारी शिष्य तुम ही बनोगे.:)
रामराम.
April 28, 2010 at 8:26 PM
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैयालाल की ।
April 28, 2010 at 8:34 PM
बढिया खेल है!
लगे रहो!
April 28, 2010 at 8:42 PM
अले वा हमको तो मजा आ गया तुम्हारे आनंदमयी चेहरे को देखकर
April 28, 2010 at 8:44 PM
तबडिक तबडिक
April 28, 2010 at 8:46 PM
घुड़सवार के पास लाएसेंस है कि नहीं, अभी चेक करता हूँ:)
April 28, 2010 at 9:14 PM
आदि को मजा आ रहा है ना !!
April 28, 2010 at 9:48 PM
बेटा, लगाम और चाबुक कहां है?
अगली बार जब भी इस घोडे पर बैठोगे तो ये दोनों चीजें पहले परख लेना?
April 28, 2010 at 11:36 PM
अपने हाथ से बान्धिये घोडे का तंग चाहे आपके साथ हो लाखो लोग संग
April 29, 2010 at 1:12 AM
वाह बेटा तुम्हारा घोडा तो पढा लिखा दिखता है, जोम बिना चाबुक के सीधा चल रहा है, ओर काठी की जरुरत भी नही. बहुत सुंदर
April 29, 2010 at 3:10 AM
वाऊ..... टिक टिक टिक टिक
(buzz)
April 29, 2010 at 3:10 AM
घोला भी पियाला ऑल छ्वाल भी. दोनों छो-छो छाल के होना.
(buzz)
April 29, 2010 at 4:47 AM
जबरदस्त घोडा है जरा जम के सवारी करना !
April 29, 2010 at 5:05 AM
...बहुत सुन्दर !!
April 29, 2010 at 5:44 AM
चल घोड़े टिक टिक टिक :)
April 29, 2010 at 8:39 AM
वाह आदि तो बहुत ही मजे ले रहा है
April 29, 2010 at 12:54 PM
सुना है घोडा खड़े खड़े सोता है.. इस घोड़े कि क्या हालत है?? :)
April 29, 2010 at 7:25 PM
@समीर भाई:
इतना प्यारा सवार हो तो घोड़ा खुश तो होगा ही न..
जोधपुर में आदि को घोड़े पर बिठाया... एक चक्कर लगाने के बाद घोड़े वाला दीवाना हो गया.. और पैसे लेने से भी मना कर दिया....
April 29, 2010 at 7:25 PM
"ये घोड़ा तो हंसने वाला है. :)"
(पिकासा पर समीर भाई)
April 30, 2010 at 6:15 AM
काका आदि...अब नीचे आ जाओ..यह घोडा़ नही...पापा हैं...
May 1, 2010 at 4:43 PM
मज़ेदार और मनभावन होने के कारण
चर्चा मंच पर
मेरा मन मुस्काया!
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!
May 1, 2010 at 4:46 PM
मनभावन होने के कारण
चर्चा मंच पर
मेरा मन मुस्काया!
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!
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