और ये वाक्य निकला पलंग के किनारे खड़े होकर.. पापा मम्मी को छकाने के लिए...
और भी कुछ वाक्य -"ये तो बाबा का प्लेन है'
"आदि को निचे उतारना"
"दुधु मम्मू पिलाएगी"
"ये तो पिजन की पोटी है"
"सुन्दर सुन्दर फूल खिले है"
"आदि दुधु लेने गया था"
"मम्मा आदि को सुला दो"
"मम्मू खेलें"
"बाबा बार चले"
"कौन आया"
"झूले पर चले"
फिर मिलते है.. बाय बाय..
March 19, 2010 at 8:05 PM
बाबा बार चले
-वाह बेटा, पूत के पांव पालने में...ताऊ के रास्ते चलना है क्या?? ये बाबा से नहीं, समीर अंकल से कहना पड़ेगा जब २५ साल के हो जाओ.. :)
March 19, 2010 at 8:32 PM
बेटा, बार तो समीर अंकल ही ले जायेंगे तुझको.:) ताऊ तो तेरे को चंपाकली भैंस का मलाईदार दूध ही पिलवायेगा.:)
रामराम.
March 19, 2010 at 8:58 PM
भई ये गुजराती स्टाईल के डिजाइनर अंगरखे में आदि बहुत प्यारा लग रहा है। अच्च्च्ची तस्वीर।
वैलीईईईईई गूउउउउद
March 19, 2010 at 8:59 PM
आदि बेटा तुम्हारी डिक्शनरी में शब्द बढ़ रहे हैं जान कर अच्छा लगा :)
March 19, 2010 at 9:12 PM
बहुत कुछ सीख गए तुम तो .. शुभकामनाएं !!
March 19, 2010 at 9:33 PM
dheere dheere sab bolna aa jaayegaa .
gaay ka dudh pina ho to mere pass aa jana
March 20, 2010 at 2:25 AM
"ये तो पिजन की पोटी है!"
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वाह, क्या बात है!
लगता है - कवि बनोगे!
March 20, 2010 at 2:37 AM
वाह वाह आदि, तुम तो बहुत कुछ सीख गए ..... फिर कब मिलोगे... ??
March 20, 2010 at 3:05 AM
अरे आदि यह भम्म शव्द ने मुझे अपने बच्चो का बचपन याद दिला दिया, वेसे तेरी सारी हरकते मुझे पहले ही पता चल जाती है....बहुत सुंदर लग रहा है आज तो बेटा इस पोशाक मै. बहुत सा प्यार
March 20, 2010 at 4:13 AM
तो बाबा के साथ बार में जा रहे हो..
March 20, 2010 at 4:23 AM
बहुत सुन्दर !!!!
March 20, 2010 at 4:51 AM
भम्म बार जाने के पहले हुये न?
March 20, 2010 at 5:04 AM
बस चार दिन की बात है ब्लाग डिक्टेट करने लगोगे
March 23, 2010 at 7:26 AM
सच मे
आदि भाई को पकड़ना, आदि भम्म हो रहा है
nice picture.
March 24, 2010 at 12:16 AM
बढ़िया है. नए-नए शब्द बनेंगे तभी तो हम लोग बड़ों को छाकायेंगे .
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"पाखी की दुनिया" में इस बार पोर्टब्लेयर के खूबसूरत म्यूजियम की सैर
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