दिल्ली से १७ जनवरी को निकले.... काफी कोहरा था... लग रहा था की फ्लाईट लेट होगी.. पर नहीं.. हम लक्की थे.. जब पहली बार बोर्डिग कार्ड मिला था तो बिना नाम का.. लेकिन इस बार बोर्डिंग कार्ड भी मेरे नाम का मिला... मेरी मस्ती एयपोर्ट पर शुरू हो गई.. मैं भागना चाह रहा था पर.. पापा मुझे जाने नहीं दे रहे थे.. आखिर सिक्योरिटी चेक पर पापा की पकड़ ढीली हुई और मैं लाइन से बाहर.. ऐसे ही मस्ती करते हुए हमारी बोर्डिंग भी हो गई.. पर मुझे प्लेन तक ले जाने वाली बस ज्यादा पसंद आई.. प्लेन में जाने के बजाय बस में घूमना चाह रहा था पर..
एक बार प्लेन में सवार हुआ तो मस्ती वहा भी शुरू हो गई...
February 12, 2010 at 5:57 PM
१० दिन की मस्ती चार पोस्टो मे ..... बहुत नाइंसाफ़ी है .
February 12, 2010 at 5:59 PM
वाह ! बढ़िया मौज लेकर आये हो |
February 12, 2010 at 7:09 PM
ha ha ha ha oye hero sach me plane se badlon ke bich me se gujarna behad romanchak hota hai...
love ya
February 12, 2010 at 7:55 PM
बहुत अच्छे, बादलों मे घूमने के लिये तुझे मेरे पास आना पडेगा, मैं तेरे को जादू सिखाऊंगा.:)
रामराम
February 12, 2010 at 9:59 PM
उड़न तश्तरी में बैठ कर बादल घूम लेना बबुआ..:)
मस्ती कटी..अब जल्दी जल्दी सुनाओ!!
February 13, 2010 at 1:30 AM
आदि बेटा!
तुम्हारे मनोहारी चित्र देखकर तो हमें भी अपना बचपन याद आ गया!
February 13, 2010 at 3:25 AM
धरती से आकाश तक के
सफल मधुरिम सफर के लिए बधाई!
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की -
नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
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संपादक : सरस पायस
February 13, 2010 at 4:49 AM
अरे तुम ने बताया ही नही, जब मिले, वेसे हो बहुत मस्त बहुत बहुत प्यार आदि अब पापा से बोलो मै तुम्हारी सारी फ़ोटो मेल कर दुं क्या?
February 13, 2010 at 6:25 AM
आदि तुम्हारे पापा बहुत गड़बड़ कर रहे हैं भाई , दस दिन की घुमक्कड़ी पर केवल ४-५ पोस्ट ? बहुत नाइंसाफी है..
buzz
February 13, 2010 at 6:27 AM
धीरू भाई, अली भाई..
पोस्ट में कंजूसी नहीं की जायेगी.. सारी बाते/फोटो पोस्ट करुगा चाहे कितनी भी पोस्ट हो जाए.. आभार..
February 13, 2010 at 9:03 AM
अले वाह आदि...मम्मी-पापा के छात हवा में उल रहे हो...बहुत अच्छे....!!
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