बहुत दिन बाद दिखे आदि .. कहां थे ??
जर्मनी वाले बाबा . बहुत अच्छे हमारा इम्तिहान ले रहे हो
आदि बेटा कहां थे इतने दिनों तक ? दादा जी के साथ खान पान मिष्ठान्न की फोटो भाई वाह !
अरे वाह, भाटिया दादा जी से मिले..और गुलाबजामुन तो तुमने खा लिये फिर दादा जी?? चलो, उनको तो मीठा खाने के लिए वैसे भी मना है न!!
हां बेटा ये अच्छा किया, हरयाणवी दादा से मिल लिये, अब तेरी ट्रेनिंग सही शुरु हुई.:) रामराम.
वाह बेटा आदि!तुम तो हमारे ही पोते निकले!भाटिया जी हमारे भाई ही तो हैं!
अरे वाह ! जर्मनी वाले हरयाणवी दादा जी के साथ |भई वाह आदि ! ये हुई ना असली ब्लोगर मीट :):)
राज दादा के बारे में द्विवेदी सर के ब्लॉग पर पढ़ा था कि आप अकेले खाना नहीं खाते इसलिए आदि यहाँ कंपनी दे रहें हैं. बदले में गुलाब जामुन ! सौदा बुरा नहीं हैं:)
वाह ये हुई न बात...यूं खाते हैं पूरी हथेली भर कर, तब कहीं मज़ा आता है..
भाटिया जी के साथ आदि को देख कर अच्छा लग रहा है।
अरे आदि, दादा जी से तो हम भी तीन दिन मे दो बार मिल चुके हैं. लेकिन तेरा नसीब है कि दादा खुद तेरे यहां आये हैं. हमे तो दादा जी के पास ही जाना पडा था.
February 5, 2010 at 8:12 PM
बहुत दिन बाद दिखे आदि .. कहां थे ??
February 6, 2010 at 12:06 AM
जर्मनी वाले बाबा . बहुत अच्छे हमारा इम्तिहान ले रहे हो
February 6, 2010 at 3:16 AM
आदि बेटा कहां थे इतने दिनों तक ? दादा जी के साथ खान पान मिष्ठान्न की फोटो भाई वाह !
February 6, 2010 at 4:59 AM
अरे वाह, भाटिया दादा जी से मिले..और गुलाबजामुन तो तुमने खा लिये फिर दादा जी?? चलो, उनको तो मीठा खाने के लिए वैसे भी मना है न!!
February 6, 2010 at 5:22 AM
हां बेटा ये अच्छा किया, हरयाणवी दादा से मिल लिये, अब तेरी ट्रेनिंग सही शुरु हुई.:)
रामराम.
February 6, 2010 at 5:30 AM
वाह बेटा आदि!
तुम तो हमारे ही पोते निकले!
भाटिया जी हमारे भाई ही तो हैं!
February 6, 2010 at 7:04 AM
अरे वाह ! जर्मनी वाले हरयाणवी दादा जी के साथ |
भई वाह आदि ! ये हुई ना असली ब्लोगर मीट :):)
February 6, 2010 at 7:17 AM
राज दादा के बारे में द्विवेदी सर के ब्लॉग पर पढ़ा था कि आप अकेले खाना नहीं खाते इसलिए आदि यहाँ कंपनी दे रहें हैं. बदले में गुलाब जामुन ! सौदा बुरा नहीं हैं:)
February 6, 2010 at 8:08 AM
वाह ये हुई न बात...यूं खाते हैं पूरी हथेली भर कर, तब कहीं मज़ा आता है..
February 6, 2010 at 6:40 PM
भाटिया जी के साथ आदि को देख कर अच्छा लग रहा है।
February 7, 2010 at 4:25 AM
अरे आदि,
दादा जी से तो हम भी तीन दिन मे दो बार मिल चुके हैं. लेकिन तेरा नसीब है कि दादा खुद तेरे यहां आये हैं. हमे तो दादा जी के पास ही जाना पडा था.
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