फिर छुट्टी वाले दिन (शनिवार २३ जनवरी) को पापा मुझे लेकर स्वीमिंग पूल पर गए.. एक पल तो डरा.. ठंडा ठंडा पानी... सुबह सुबह.. पर जैसे ही शावर लिया.. सर्दी छू मंतर हो गई.. और अपने साथ डर भी ले गई... फिर तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई.. कुछ देर तो ट्यूब पर बैठा.. फिर तो पूल भी खेल के मैदान जैसा हो गया... विश्वास नहीं होता न? फोटो लाया हूं.. खुद देख लो..
| पूल में शुरुआत |
| अब आने लगा मजा.. |
| ज़रा घूम के देखे कितना बड़ा है? |
| अब ट्यूब की जरुरत नहीं.. |
| छपाक... |
| जम्प कर के देखें... |
| ट्यूब.. नो.. मत.. जाओ.. |
| ये अच्छा है.. |
| लास्ट स्टंट.. डाईव... |
| ये धम्म... चेतावनी: ये स्टंट खतरनाक है... किसी बच्चे की देखरेख में ही करें... :) |
आभार..
पता है मुझे 'संवाद सम्मान-2009' की श्रेणी 'बच्चों का ब्लॉग' में नोमिनेशन मिला है... है न खुशी की बात.. मेरे हमसफर बने रहने के लिए आप सभी का आभार..
thank you!!

February 15, 2010 at 4:59 PM
किसी बच्चे की देखरेख में कि बड़े की देखरेख में...पापा को बच्चा समझ रहे हो बालक!! वैसे हैं तो बच्चा ही वो भी.. :)
बड़ा मजा आया देखकर तुम्हारी मस्ती!!
February 15, 2010 at 5:53 PM
वाह ! मजा आ गया |
पूल में तो ठीक पर कभी जोधपुर प्रवास पर कायलाना में छलांग लगाने की मत कोशिश करना !
चेतावनी: ये स्टंट खतरनाक है... किसी बच्चे की देखरेख में ही करें... :)
@ लगता है इसीलिए पापा पूल में आदि की देखरेख में नहा रहे है हा हा ...........:)
February 15, 2010 at 7:42 PM
अरे ओये पलटू,
पूल मे तेरी प्रैक्टिस हो गयी है, अब कल समुद्र मे छलांग लगाना.
देखना खूब मजा आता है.
February 15, 2010 at 8:18 PM
भाई हमें तो ये देख कर अच्छा लगा कि आदि नें पापा की देखभाल सही तरीके से की वर्ना पानी में अकेले उतरना कित्ता रिस्की है ! है ना ?
buzz
February 15, 2010 at 8:50 PM
पानी में कितना मछली पकडे बेटूलाल?
February 15, 2010 at 10:01 PM
आदि मैं तो ये स्टंट तेरी देख रेख मे ही करुंगा. तुझसे ज्यादा अनुभवी बच्चा मुझे कहां से मिलेगा?
रामराम.
February 15, 2010 at 10:10 PM
nice pics lyk always..
February 15, 2010 at 10:44 PM
kyaa masti haen aadii dear !!! papa ko seekha hi diya swim karna
February 16, 2010 at 3:48 AM
dhyan se nanhe....idhar to barish ne thandi bada di hai...
facebook
February 16, 2010 at 5:28 AM
Waah!Sundar tasveeren!
February 16, 2010 at 8:40 AM
हम तो भई आदि की देखरेख में ही तैरना सीखेंगे!
February 16, 2010 at 8:53 AM
छइ ... छपा ... छइ ...
छपाक् ... छइ ... !
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की -
"नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा! "
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संपादक : सरस पायस
February 16, 2010 at 9:28 AM
आदि बेटा बहुत सुंदर लगा, मजेदार,
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