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पद्मनाभपुरम...


शनिवार को सुबह स्वीमिंग पूल में मस्ती के बाद हमने दिन में घूमने का कार्यक्रम बनाया.. प्लान था की विवेकानंद रॉक मेमोरियल जाया जाए...तो हम नागरकोविल से कन्याकुमारी की और चले.. करीब १० किमी चले थे की मुझे नींद आ गई.... और जब सोता हूं तो कम से कम एक दो घंटे तो सोता ही हूं.. कन्याकुमारी पहुँचने में २०-३० मिनिट और लगाने थे.. और अगर में नींद में हूं तो क्या कन्याकुमारी और क्या दूसरी जगह.. पापा ने तुरंत प्लान 'बी' के बारे में सोचा... पता लगाया की पद्मनाभपुरम कितनी दूर है.. स्नेहल चाचा ने बताया की वहाँ जाने में करीब एक घंटा लगेगा.. .. बस फिर क्या था.. तुरंत गाड़ी मोड़ी और चले पद्मनाभपुरम की और..

और जैसे ही हम वहां पहुचे मेरी नींद पूरी हो चुकी थी.. और फिर आराम से पैलेस घुमे..

१६ वी सदी में बना ये पैलेस वेळी हिल्स की तहलटी में स्थित है.. इस के बारे में पूरी जानकारी  यहाँ है.. और मेरे साथ पैलेस घूमना हो तो ये रहे कुछ चित्र....


पैलेस के दरवाजे पर ये दीपक बना है... घोड़े के साथ..


ये लकड़ी की सीढिया.. अंदर जाने के लिए...

इस जगह पर राजा खाना खिलाते थे... १००० आदमियों को.. मेरे लिए तो भागने का मैदान..

एक पोज इस खम्बे के साथ..

पापा मम्मी और आदि... तोनि तोनि..(तीनों तीनों)

कितना साफ फर्श है.. 

ये हाथी भी पसंद है..

वहाँ के म्यूजियम भी ही.. पुरानी मुर्तिया और सामान रखे हे.. मुझे तो ये छेनन पसंद आये..

ये शिलालेख.. आप पढ़ो.. में तो चाचा और मम्मी के साथ छुपा छुपी खेल रहा हूं..

मम्मी मैं यहाँ हूं...

कभी कन्याकुमारी या त्रिवेन्दम जाना हो तो जरुर घूमना.. बहुत सुन्दर महल है... 

आया पसंद?

7 comments:

Comments

तोनो तोनि...बहुत प्यारे!!



मजा आया तुमको खुश दौड़ते देखकर!!


वाह वाह हमें भी बहुत पसंद (पछंद) आया


यार तू इतनी मस्ती करता है..कहीं हमारी नजर ना लगे. आज काजल लगवा कर नजर उतरवा लेना याद से.

रामराम.


भइ, वाह!
हमें तो ऐसे ही मज़ा आ गया -
"मीठा-मीठा-मीठा!"


अली सैयद

आदि भैया तुम्हारे कारण से हमें भी कितनी अच्छी अच्छी जगह देखने को मिल रही हैं :)

buzz


khub khub acchi photo hain hero.....

regards


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