कल बताया की जब हम शाम को कन्याकुमारी के बीच पर पहुचे तो घोड़ा जा चुका था... बल्कि घोड़ा हमारे सामने ही निकल गया.. और हम अपनी गाडी से देखते रह गए.. घुड़सवारी तो करनी ही थी.. तो हम अगले दिन शाम को फिर कन्याकुमारी पहुँच गए.. इस बार थोडा जल्दी.. लेकिन आज भी घोड़ा हमारे सामने से जा रहा था.. no, not again!!
लेकिन उस दिन तो पापा ठान के आये थे.. तुरंत गाडी से उतरे और घोड़े का पीछा करने लगे.. और थोड़ी देर में पापा और घोड़े वाले भैया बात कर रहे थे.. भैया पहले तो मना करने लगे पर पापा ने उन्हें मना ही लिया.. और आदि घोड़े पर सवार हो गया..
एक बार सवार हुआ तो भैया को भी अच्छा लगा.. तो थोड़ी देर का कहने वाले भैया आदि को दूर दूर तक घुमाने ले गए.. और मैं तो घुडसवारी के मजे ले ही रहा था.. टिक टिक घोड़ा... मंजा आ गया... कल मिलते है एक नये किस्से के साथ..
February 14, 2010 at 5:35 PM
घोड़ा भी तो कितना खुश दिख रहा है बबुआ को बैठा कर. :)
February 14, 2010 at 5:38 PM
असली क घोडा घोडे पर आदि
शादी से पहले दुल्हे की तैय्यारी
February 14, 2010 at 8:06 PM
मजा आया होगा खूब !
February 14, 2010 at 8:06 PM
वाह .. क्या कहने !!
February 14, 2010 at 8:18 PM
Wonderful....Enjoying the Horse-riding !!
February 14, 2010 at 9:17 PM
वाह यार आदि क्यों जी जला रहा है हमारा? अकेले अकेले घोडे की सवारी भी करली. कोई बात नही. कभी हम से मिलना तू.
रामराम.
February 15, 2010 at 12:27 AM
इत्ता सुन्दर घोडा और उस पर इत्ता बढ़िया सवार...पर पीछे के भैया को हटाओ यार !
आदि अपना तो मन है कि ये घोडा जैसे भी जोधपुर आना चाहिए...बस !
buzz
February 15, 2010 at 3:13 AM
"संवाद सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई!"
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "वसंत फिर आता है - मेरे लिए,
नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा! "
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संपादक : सरस पायस
February 15, 2010 at 3:45 AM
आदित्य (Aaditya) को सम्मान के लिए बधाई!
February 15, 2010 at 3:45 AM
आदित्य (Aaditya) को सम्मान के लिए बधाई!
February 15, 2010 at 5:27 AM
ओए, अभी से समीर अंकल वाली आदत पाल ली..पहले चश्मा पहन कर बराबरी करते थे अब सम्मान वम्मान भी...वाह वाह!!
बहुत बधाई मेरे बबुआ को...तुम तो हो ही बेस्ट..समीर अंकल भला कहाँ ठहर सकते हैं अपने बबुआ के आगे..खूब नाम कमाओ!!
बधाई और शुभकामनाएँ..
अब मम्मी को कहो..मिठाई कहाँ है??
February 15, 2010 at 7:39 AM
वाह वाह !! घुड़सवारी में खूब मज़ा आया होगा.... संवाद सम्मान के लिए बधाई !!
February 15, 2010 at 9:08 AM
बहुत सुंदर आदि अब घोडे की सवारी की आदत पड गई है, दुवारिका मै ऎसा घोडा तो नही मिलेगा, लेकिन एक घोडा हमेशा तेयार रहे गा....अरे पापा को बना लेना टिक् टिक घोडा, बहुत सुंदर बेटा
February 16, 2010 at 7:37 AM
सुन्दर ............
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