"बाबा का बेग"
"मम्मु का फोन"
"आदि की साइकल"
"साइकिल पर बिठाओ"
"झूले पर बिठाओ"
और भी कई मजेदार वाक्य बना लेता है.. आदि बाबु...
समझदारी
कल शाम को तो आदि ने समझदारी के झंडे गाड़ दिए.. मम्मी जब बाबा से फोन पर बात कर रही थी तो आदि गायब हो गया.. बात पूरी करने के बाद जब मम्मी मुझे ढूढने लगी.. तो पता चला आदि बाबू बाथरूम में गए है.. शु शु करने.. और बाबू कमोड के पास मूत्र विसर्जन कर आये.. लेकिन आदि बाबु शु शु करने से पहले पामा भी खोलना होता है..:)
February 21, 2010 at 11:12 PM
पामा पहनाने वाले जाने उसे उतारना, शू शू करने वाले जाने करना!
February 22, 2010 at 12:26 AM
देखिये काम तो पहले से ही बंटे हुए हैं शुशू करना आदि का काम लेकिन पाजामा खोलना किसका काम था ? एक तो आप लोग अपने काम में कोताही करते हैं दूसरे बच्चे पर अंगुली उठाते हैं ...हाँ तो आदि बेटा पापा मम्मी की गलती पर शर्मिन्दा होने का नईं :)
Buzz
February 22, 2010 at 12:46 AM
अच्छी लगा आदि की अदा!
February 22, 2010 at 2:47 AM
वाह आदि की सभी बातें निराली :)
February 22, 2010 at 3:19 AM
ही ही हू हू
ओहो पामे में ही कर दी.
February 22, 2010 at 3:37 AM
आदि के मुँह से निकने नए-नए
बहुत सुंदर शब्दों का
एक कोश बनना चाहिए!
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की –
"नवसुर में कोयल गाता है, मीठा-मीठा-मीठा!
श्रम करने से मिले सफलता,परीक्षा सिर पर आई! "
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संपादक : सरस पायस
February 22, 2010 at 4:21 AM
बेचारा गया तो बाथरुम तक..अभी वहीं कर देता तो पोंछते रहते..पामा खोलना भी सीख ही जायेगा. :)
जरा विडियो बनाकर उसका वाक्य बनाना तो सुनवाओ भाई...
February 22, 2010 at 5:53 AM
आदि की अदा सुब्हान-अल्लाह!!
February 22, 2010 at 6:28 AM
पर अभी तू कहां है? मुझे दिखाई क्यों नही देरहा है? सिर्फ़ एक चमगादड ही उल्टा लटका दीख रहा है?:)
शाबास आदि, आज बढिया काम किया तूने.
रामराम.
February 22, 2010 at 6:52 AM
हा हा हा ..अच्छा है.
February 22, 2010 at 8:48 AM
आदि बाबु....बहुत सयाने हो गये हो, कोई बात नही पाजामा भी खोलना आ जायेगा.
February 27, 2010 at 12:58 AM
Majedar..ha..ha..
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रंग-बिरंगी होली की बधाई.
March 1, 2010 at 12:54 AM
जन्मदिन की बधाई
रंजन प्यारे भाई।
March 4, 2010 at 12:58 AM
.सुन्दर और मन भावन!!
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