पहले साइकिल आ नंबर आया... बैठने की जगह तो एक के लिए ही थी पर अभि ने फरमाइश कर मुझे भी बिठा दिया...
अगला नम्बर था "हट" में छुपा छुपी खेलने का.. "भागो, भागो, पकड़ो, पकड़ो"
और ये क्या.. आदि नीचे और अभि ऊपर...
पापा ये सभी शरारतें कैमरे में कैद कर रहे थे... तो हमने भी कैमरे की डिमांड कर डाली.. अपनी फोटो खुद लेगें...
अगली बारी घोड़े की थी... दोनों दोनों घोड़े की सवारी कर रहे थे... बारी बारी..
और जब बिस्तर लग गया तो... जंप जंप करने का मजा लिया...
हमारी दोस्ती इतनी पक्की हो गई की मैं दिल्ली में "अभि-अभि" करता रहता हूँ और अभि भोपाल में "आदि-आदि"
कैसी लगी हमारी दोस्ती..
January 12, 2010 at 11:52 PM
ओये ओये खुब मस्ती हो रही है हीरो.... अभी भी बेहद प्यारा है.....नया दोस्त मुबारक हो हीरो.....
love ya
January 13, 2010 at 3:54 AM
वाह..नया दोस्त अभि..और उसके साथ इतनी मस्ती..अब तुम कब भोपाल जा रहे हो?? लवि से पूछ कर जाना...उसको भोपाल की सब बढ़िया जगह मालूम है खेलने के लिए.
January 13, 2010 at 4:27 AM
"नए साल में नई दोस्ती - तुमको बहुत मुबारक़ हो!"
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ओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती, रंग-रँगीली शुभकामनाएँ!
नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
संपादक : "सरस पायस"
January 13, 2010 at 4:56 AM
aur ham bareilly me aadi aadi kar rahe the kai dino se
January 13, 2010 at 6:37 AM
देखा दोस्तों के साथ कितना मजा आता है इसीलिए तो लोग दोस्त बनाते है
January 13, 2010 at 6:45 AM
मजेदार रहा ये मिलन!
लोहिड़ी पर्व और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!
January 13, 2010 at 7:08 AM
तो नये दोस्त के साथ खूब मस्ती की आपने :)
January 13, 2010 at 7:19 AM
बहुत सुंदर आदि,बहुत प्यारा दोस्त है तुमहारा, बिलकुल तुमहारी तरह
January 13, 2010 at 8:57 AM
पापा वापिस आये बढ़िया !
एक दोस्त लाये और भी बढ़िया !
January 13, 2010 at 8:06 PM
वाह आदि...मकरसक्रांति की शुभकामनाएं. नया दोस्त अभि भी तेरी तरह बहुत ही प्यारा है.
रामराम
January 13, 2010 at 9:36 PM
मजेदार प्यारे! हम तुम्हारी उम्र के हो जायें तो क्या मजा रहे!
January 14, 2010 at 3:24 AM
खूब मस्ती हो रही है आदि जी
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