कैसा लगा?
पकड़ सकते हो!!
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विडियो
ये मेरा पसंदीदा खेल है.. कभी बाबा के साथ तो कभी मम्मी के साथ.. खूब खेलते है पुरे जोश और मस्ती के साथ.. बाबा थक जाते है पर 'आची' नहीं.. २ मिनिट का ये वीडियो देखिए और बताइये आप पकड़ेगें मुझे..
कैसा लगा?
कैसा लगा?
December 3, 2009 at 5:51 PM
बाबा को रोज ऐसे ही दौड़ाया कर जब तक वे हांफ न जाए |
December 3, 2009 at 6:44 PM
ये हुई ना बात !
December 3, 2009 at 6:54 PM
यार आदि तू तो फ़ोकट मे एक्सरसाइज करवा रहा है. फ़िस लागू करदे.:)
रामराम.
December 3, 2009 at 7:02 PM
आची को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है हा हा हा हा हा हा
love ya
December 3, 2009 at 7:37 PM
बाप-बेटे का खेल और टी.वी. के प्रोग्राम!
मजा आ गया आज तो!
December 3, 2009 at 7:38 PM
बेटा मेरे, समझो...ये पापा की चाल है आदि को सुलाने के लिए...और तुम खुश होकर दौड़ रहे हो... सुला दिया न थका कर बच्चे को... :)
आदि को तो क्या कहें..बच्चा है..समझता नहीं..मगर हम सब समझ रहे हैं...रंजन भाई, बहुत सही तरीका खोजे हो, क्यूँ :) !! हा हा!!
December 3, 2009 at 8:58 PM
दौडते रहो दौडाते रहो
December 3, 2009 at 9:28 PM
वाह वाह आदि योँही हंसते खेलते रहो आशीर्वाद्
December 4, 2009 at 3:03 AM
हमें तो खुद को पकड़ने के लिए कहते हो.. और खुद जा जाकर कैमरा पकड़ते हो.. ये क्या बात हुई ?
December 4, 2009 at 8:42 AM
अरे वाह ...कितना क्युट लग रहे हो दौदते हुये?
December 4, 2009 at 9:17 AM
आदि यार तुने तो मेरे बच्चो का बचपन याद दिला दिया, बहुत सुंदर
December 4, 2009 at 10:54 AM
अरे वाह !!! अदित्य आपने दौड़ने के बहाने अच्छी खासी एक्शरसाईज कर ली :)
December 5, 2009 at 9:16 AM
शाबाश बेटा यूं ही खेलते रहो.
December 13, 2009 at 7:43 AM
दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा.. दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा..
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