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पकड़ सकते हो!!

ये मेरा पसंदीदा खेल है.. कभी बाबा के साथ तो कभी मम्मी के साथ.. खूब खेलते है पुरे जोश और मस्ती के साथ.. बाबा थक जाते है पर 'आची' नहीं.. २ मिनिट का ये वीडियो देखिए और बताइये आप पकड़ेगें मुझे..


कैसा लगा?

14 comments:

Comments

बाबा को रोज ऐसे ही दौड़ाया कर जब तक वे हांफ न जाए |


ये हुई ना बात !


यार आदि तू तो फ़ोकट मे एक्सरसाइज करवा रहा है. फ़िस लागू करदे.:)

रामराम.


आची को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है हा हा हा हा हा हा
love ya


बाप-बेटे का खेल और टी.वी. के प्रोग्राम!
मजा आ गया आज तो!


बेटा मेरे, समझो...ये पापा की चाल है आदि को सुलाने के लिए...और तुम खुश होकर दौड़ रहे हो... सुला दिया न थका कर बच्चे को... :)


आदि को तो क्या कहें..बच्चा है..समझता नहीं..मगर हम सब समझ रहे हैं...रंजन भाई, बहुत सही तरीका खोजे हो, क्यूँ :) !! हा हा!!


दौडते रहो दौडाते रहो


वाह वाह आदि योँही हंसते खेलते रहो आशीर्वाद्


हमें तो खुद को पकड़ने के लिए कहते हो.. और खुद जा जाकर कैमरा पकड़ते हो.. ये क्या बात हुई ?


अरे वाह ...कितना क्युट लग रहे हो दौदते हुये?


आदि यार तुने तो मेरे बच्चो का बचपन याद दिला दिया, बहुत सुंदर


अरे वाह !!! अदित्य आपने दौड़ने के बहाने अच्छी खासी एक्शरसाईज कर ली :)


शाबाश बेटा यूं ही खेलते रहो.


दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा.. दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा..


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