मम्मी के साथ गोल गोल घूमने वाला झूला..
ये छुक छुक ट्रेन..
ये दादी की बिंदी..
मेले में जाए और बेलून न लाये...
घर पर.. बेलून ऊपर.. आदि नीचे..
शरारत ऑफ द डे पापा के 'लेपटाप' पर अब आदि की नजर है... आदि को लेपटाप पर जू जू देखने होते है.. तो ब्लॉग पर आपको नए पोस्ट नहीं मिले तो समझियेगा की आदि जू जू देख रहा है.... |
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December 27, 2009 at 5:42 AM
अरे वाह!! आदि की तो मस्ती हो गई...आदि से भी बड़ा बैलून!! :)
December 27, 2009 at 5:47 AM
बड़े-दिन और क्रिसमस की बधाई!
December 27, 2009 at 7:26 AM
बहुत मस्ती की न .. सपरिवार तुम्हें क्रिसमस की बधाई !!
December 27, 2009 at 7:46 PM
इसी तरह से मम्मी पापा और दादी को घुमाते रहा करो बेचारे घर में बोर हो जाते होंगे !
December 27, 2009 at 9:03 PM
वाह भाई आदित्य बाबा ,आज तो चोटी भी बना ली?:) नये साल की रामराम.
रामराम.
December 28, 2009 at 3:27 AM
वाह तो खूब खेली-खेली की !
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