मेट्रो में गए बहुत दिन हो गए.. बहुत दिनों से दूर से ही देखता हूँ... कल बाबा ने मन बनाया की चलो आदि को मेट्रो में घुमा कर लाते है.. फिर क्या बाबा ने मुझे तैयार किया.. और एक सुन्दर सी पोनी भी बना दी...
फिर हम पहुच गए सेक्टर १३ के मेट्रो स्टेशन पर.. सुरक्षा जाँच करवाई.. और चले प्लेटफार्म पर.. कुछ देर बाद आई मेट्रो में हम सवार हो गए...
और शुरू हो गया आदि... छुक छुक ऊउऊ..........
मेट्रो में ज्यादा लोग नहीं थे.. पर जो थे वो मुझसे हेलो करने और स्माइल करने से नहीं चुके..
पसंद आया..
December 18, 2009 at 6:49 PM
वाह बिटवा पोनी बना के मेट्रो की सवारी ...ऐश हो रही है ..शाबास घूमो खूब घूमो ....और छुक छुक रेल चलाओ ..जियो मेरे लाल
December 18, 2009 at 7:09 PM
आदि बेटा तुम्हारे पापा बहुत अच्छे हैं .......7
December 18, 2009 at 7:19 PM
हम तो तो हैलो कहते पोनी वाली बच्ची को... :)
December 18, 2009 at 9:56 PM
देख ले बेटा आदि..समीर अंकल तेरी पोनी की मजाक उडा रहे हैं और तेरे को बच्ची को बोल रहे हैं?:)
पर यार कुछ भी कह...तू कुछ ज्यादा ही जंच रहा है आज तो. जरा काजल लगवा लेना बाबा से.
रामराम.
December 18, 2009 at 10:24 PM
लेलगाली, लेलगाली.....
जिसपर हमको है नाज़, उसका जन्मदिवस है आज।
कोमा में पडी़ बलात्कार पीडिता को चाहिए मृत्यु का अधिकार।
December 18, 2009 at 11:56 PM
तुमसे कौन बात नहीं करना चाहेगा.. ?
मस्त लग रहे हो पोनी में...
December 19, 2009 at 12:47 AM
हैलो आदि!
बहुत शौकीन हो भाई घूमने के!
December 19, 2009 at 3:05 AM
अरे वाह !
घूम आये मेट्रो , हम तो मेट्रो को अभी तक दूर से ही देख रहे है |
December 19, 2009 at 4:24 AM
बहुत सुंदर बात कही पापा ने , बहुत प्यारे लग रहे हो
December 19, 2009 at 6:37 AM
वाह..तुम्हारी मेट्रो ने छुक छुक की
लेकिन हमारी मेट्रो तो बस घूंंंं ही करती है :)
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