हेलो मम्मु!!
मेरी आवाज आ रही है.. जल्दी आओ!!
शरारत ऑफ द डे शाम को बाबा अपना खाना लेकर आये.. प्लेट में गरम गरम चावल थे.. मैंने आव देखा न ताव खाना खान करके अपना बायाँ हाथ गरम गरम चावल में दे मारा.. और मेरी रुलाई शुरू.. बाबा एकदम हक्के बक्के.. तुरंत मेरा हाथ नल के नीचे लगाया... फिर हाथ ठन्डे पानी से भरे मग में दाल दिया.. मेरा रोना अब भी बंद नहीं हुआ.. लेकिन बाबा को अब तक समझ आ गया की मेरा हाथ जला नहीं है.. फिर एक गीले नेपकिन में हाथ लपेट कर हम गैलेरी में मेट्रो और भो भो देखने गए... पांच मिनिट बाद वापस आये तो मेरी मुस्कान भी वापस आ गई थी... इसी को कहते है.. "कलेजा मुंह को आना' |
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December 20, 2009 at 6:59 PM
मम्मू को बोलो जल्दी आये वरना पापा ऐसे ही करते रहेंगे..
December 20, 2009 at 7:26 PM
शाबास!! पापा को समझा दो इतने दिन में कि मम्मी कितनी मुश्किल से मेरी देखभाल करती है!!
वेरी गुड,,, वरना तो पापा सोचते थे कि आदि के साथ कौन सा काम!! :)
December 20, 2009 at 7:48 PM
हा हा हा हा हा हा ओये हीरो छोटी मोटी बातो से घबराते नहीं. chal woke up......मम्मा से बात करते देख अच्छा लगा.....
love ya
December 20, 2009 at 8:03 PM
ममता की पुकार।
मम्मी की गुहार!!
December 20, 2009 at 8:04 PM
O HO AADI YE KYA HUA , BADA DUKHA HOGA NAA!! MUMMY KO BOLO BAS AB JALDI SE JAO DEKHO DADA JI BHI GHABRA GAYE UNKO BHI DUKH LAGA HOGA .
TUMHARI FOTO BAHUT PYAARI LAG RAHI HAI, TUM KHUD HI ITANE PYARE HO , NAJAR NA LAGE, AB PAPA SE KAHO JALDI NAJAR UTAREIN:)
December 20, 2009 at 9:07 PM
यार टोपा बहुत बढिया है मुझे भी चहिये
December 20, 2009 at 9:33 PM
क्या बात है आदि भाई आप कि तो अदाये भी है निराली.
December 21, 2009 at 1:12 AM
अब तो हाथ ठीक है ना? टोपा मस्त लग रहा है.
रामराम.
December 21, 2009 at 3:35 AM
सही है इसी को कहते हैं."कलेजा मुंह को आना""
December 21, 2009 at 6:19 AM
सच कहते है आदि के पापा, इसे कहते है कलेजा मुंह को आना
December 22, 2009 at 7:57 PM
तो पापा से अपनी बातें इस तरह मनवाई जाती हैं ? बढ़िया !
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