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मैकेनिक..

परसों घर पर केबल ख़राब हो गया था.. एक अंकल आये थे ठीक करने..  घर पर जब भी ऐसी कोई बात होती है तो मेरा वहां होना बहुत जरुरी है.. आखिर मुझे ही तो सब सिखाना है..   तो देखें पहले तीन फोटो में जब अंकल काम कर रहे थे तो कैसे झांक झांक कर देख रहा था..






और जब थोडी देर बाद जब अंकल चले गए तो मैं शुरू हो गया... अपना पाठ दोहराने..  देखिए इन दो फोटो में...




है न तैयार मैकेनिक..
आया मजा..

16 comments:

Comments

हा हा हा हा हा हा सही जा रहे हो हीरो

love ya


हमारा टी वी बंद है आदि सर...चले आओ..जहाज का टिकट भेज रहे हैं. :)


भाई मैकेनिक कह कर तौहीन क्यों करते हो?
इंजीनियर कहो ना!


इन्जीनियर ही कहेंगे हम भी . बेटा टी वी भी ठीक कर लेना जब मौका लगे


ये क्‍या कर रहे हो .. तुमने मुझे तो डरा ही दिया .. नकल करने के लिए अकल चाहिए होती है .. पर तुम तो बंदरों की तरह बिना अकल के नकल करने लगे !!


मैकेनिक नहीं यार, इलेक्ट्रीशियन बन गया.


भाई हमारा फ़्युज उड गया है. अंधेरे में बैठे हैं.तुरंत आवो.

रामराम.


अरे वाह !! बहुत सही जा रहे हो :)


बहुत चाइल्ड लेबर कराते हैं! :)


न तो मेकेनिक ना ही इंजीनियर ना ही इलेक्ट्रीशियन ओर ना ही बंदर है.... आदि तो हमारा मिस्त्री है जी चलो जल्दी करो भाई


आदि .. ना ना ना.. ऐसा मत करना दोस्त.. इतनी शैतानी भी अच्छी नहीं

हैपी ब्लॉगिंग


kitne interest se dekh raha hai aadi...par ese door rakhna chahiye in sab se.....safe....


होनहार बीरवान के होत चीकने पात...


अरे वाह तुम तो इंजिनीअर बनोगे...और हमारे साथ काम करोगे...अभी से ये तेवर हैं तो आगे क्या करोगे समझ में आ गया है...और हाँ तुम्हारे ये बाल कब कटेंगे...?
नीरज


अगर ऐसे मैकेनिक ठीक करे, तब तो चीजें एकदम ही ठीक हो जाएगी।
ह ह हा।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }


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