कल सुबह पापा की बहुत याद आ रही थी.. और मुझे पता है पापा कहाँ दिखते है और बात करते है.. कंप्यूटर तो ऑन ही था...बस हेडफोन के दोनों सिरे (माइ़क और स्पीकर) सही सही लेपटाप में लगाए.. और फिर कान पर हेडफोन लगा कर पापा पापा आवाज लगाने लगा...
ये देख मम्मी भी चकित हो गई और तुंरत पापा को फोन लगा कर मेरी बात करवाई.. और पापा भी मेरी आवाज सुन.... अब ये भी मैं बताऊ.. पापा ये क्यों नहीं पूछ लेते आप...
पसंद आई मेरी ये अदा..
(फोटो सितम्बर माह का है)
November 5, 2009 at 9:46 PM
नटखट आदि...तुम्हारी शैतानियाँ अब बढती जा रही हैं...देख कर बहुत अच्छा लग रहा है...
नीरज
November 5, 2009 at 11:00 PM
आदि तुम्हारे बहुत अच्छे संस्कार हैं।
वरना इस युग में पापा को कौन याद करता है?
हाँ पाप को सब याद कर लेते हैं।
November 5, 2009 at 11:49 PM
dont worry aadi....keep smiling...
November 6, 2009 at 12:31 AM
बहुत तेज हो गए हो तुम !!
November 6, 2009 at 12:57 AM
सात समंदर पार से,
गुड़ियों के बाजार से..
अच्छी सी गुड़िया लाना..
गुड़िया चाहे ना लाना..
पप्पा जल्दी आ जाना..
ये पोस्ट देख लेना आदि.. http://prashant7aug.blogspot.com/2008/10/blog-post_17.html
November 6, 2009 at 1:13 AM
आदि समझदार होता जा रहा है?
रामराम.
November 6, 2009 at 2:15 AM
कभी यह बालक पल्टू हुआ करता था!
November 6, 2009 at 3:44 AM
aap ki ada bhi nairali hai papa ko yaad karane ka
November 6, 2009 at 4:43 AM
बिलकुल भई, आनी भी चाहिए।
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परा मनोविज्ञान-अलौकिक बातों का विज्ञान।
ओबामा जी, 70 डॉलर में लादेन से निपटिए।
November 6, 2009 at 4:45 AM
पापा को अब तो आना पड़ेगा जब आदि इतने प्यार से बुलाए तो ..स्वीट बच्चा :)
November 6, 2009 at 5:54 AM
क्या कहूँ दोस्त,,, शायद मैं भी अब कुछ दिन लवी से दूर रहूँगा... तुम्हारे पापा की दिल की बात समझ सकता हूँ.
November 6, 2009 at 8:11 PM
बहुत अच्छे आदि.. लगे रहो
हैपी ब्लॉगिंग
November 7, 2009 at 11:26 AM
Aditya aap to bahut intelligent ho..
aap ko Papa ki yaad aayi aur Papa se baat bhi ho gayee..
November 7, 2009 at 2:59 PM
बहुत ्सूंदर बेटा, अब सयाने हो गये हो, बस ओर दो चार महीनो मे पीसी चलाना भी सीख जाोगे
November 8, 2009 at 1:55 AM
आदित्य तुम तो बड़े ही समझदार हो गए हो और साथ ही थोड़ी बहुत शैतानी भी कर रहे हो !
November 9, 2009 at 6:35 PM
nice
November 10, 2009 at 5:05 AM
आदित्य
यहाँ नज़रें ठहरती हैं तो सुकून सा मिलता है . बच्चों की बातें मन को भाती हैं .फोटो सहित हों तो सोने पर सुहागा .
November 17, 2009 at 5:30 AM
हमने तो अब देखा, जब पापा आ भी गये. :)
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