किस्सा कुर्सी का..इचक दाना!! बबुआ बाना!!यही है दबोचे रहो..छोड़ना मत!!
आदि ! कुर्सी उठाते ही लगा जैसे तू भी वही खेल खेलने जा रहा है जो हमारे नेता कई बार विधानसभाओं में कुर्सियों से खेलते है !
तुम्हारे खिलौने तो कुछ भी हो सकते हैं .. पर हमारे खिलौने तो तुम जैसे प्यारे प्यारे बच्चे ही हो सकते हैं !!
वाह प्यारे जल्दी बड़े हो जाओ। बॉलीवुड़ तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है!
अभी से प्रेक्टिस कर रहे हो? बहुत बढिया है, सीख लो सब दांव पेंच.:)रामराम.
आदि तुम्हारा जवाब नहीं...तुम सच में लाजवाब हो...बहुत कमाल के फोटो लेकर वीडियो बनाया है...वाह...नीरज
बहुत बढ़िया। अब कुर्सी का इस्तमाल किस किस काम के लिए किया जाता है यह आदि से सीखना चाहिए;))
कुर्सी का खेल शुरू आदि जी :) बहुत मजेदार पकडे रहना .जम के बेठे रहना :)
गजब है किस्सा कुर्सी का...
wah beta.. abhi se hi kursi ke chakkar me lage ho.. sahi hai.. :D
कुर्सी के सब दीवाने हैं।हमारा आदि भी किसी से का नही है।
किस्सा कुर्सी का मजेदार है...
बहुत सुंदर, आदि तुमहारी कुर्सी तो बहुत प्यारी लगी
November 4, 2009 at 6:00 PM
किस्सा कुर्सी का..इचक दाना!! बबुआ बाना!!
यही है दबोचे रहो..छोड़ना मत!!
November 4, 2009 at 6:39 PM
आदि ! कुर्सी उठाते ही लगा जैसे तू भी वही खेल खेलने जा रहा है जो हमारे नेता कई बार विधानसभाओं में कुर्सियों से खेलते है !
November 4, 2009 at 8:08 PM
तुम्हारे खिलौने तो कुछ भी हो सकते हैं .. पर हमारे खिलौने तो तुम जैसे प्यारे प्यारे बच्चे ही हो सकते हैं !!
November 4, 2009 at 9:52 PM
वाह प्यारे जल्दी बड़े हो जाओ। बॉलीवुड़ तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है!
November 4, 2009 at 9:58 PM
अभी से प्रेक्टिस कर रहे हो? बहुत बढिया है, सीख लो सब दांव पेंच.:)
रामराम.
November 4, 2009 at 11:25 PM
आदि तुम्हारा जवाब नहीं...तुम सच में लाजवाब हो...बहुत कमाल के फोटो लेकर वीडियो बनाया है...वाह...
नीरज
November 4, 2009 at 11:38 PM
बहुत बढ़िया। अब कुर्सी का इस्तमाल किस किस काम के लिए किया जाता है यह आदि से सीखना चाहिए;))
November 5, 2009 at 12:16 AM
कुर्सी का खेल शुरू आदि जी :) बहुत मजेदार पकडे रहना .जम के बेठे रहना :)
November 5, 2009 at 12:59 AM
गजब है किस्सा कुर्सी का...
November 5, 2009 at 1:59 AM
wah beta.. abhi se hi kursi ke chakkar me lage ho.. sahi hai.. :D
November 5, 2009 at 6:36 AM
कुर्सी के सब दीवाने हैं।
हमारा आदि भी किसी से का नही है।
November 5, 2009 at 7:03 AM
किस्सा कुर्सी का मजेदार है...
November 5, 2009 at 10:38 AM
बहुत सुंदर, आदि तुमहारी कुर्सी तो बहुत प्यारी लगी
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