इन तीन किताबों के अलावा एक किताब पालतू जानवरों की भी है.. इन किताबों में सुन्दर सुन्दर चित्र है.. और मैं काफी देर इनके पन्ने बदलता रहता हूँ.. ये देखें मेरी अदा..
हूँ न सीरियस किताब देखने में
और पढ़ने के साथ थोड़ी सी पेट पूजा भी..
कैसी लगी मेरी ये अदा..
November 17, 2009 at 7:11 PM
ओये हीरो तुम तो सच में ही सिरिअस दिख रहे हो हा हा हा हा किताबे तो सुन्दर हैं जब तक तुम्हारी कारागिरी इन पर नहीं चलती हा हा हा
love ya
November 17, 2009 at 7:14 PM
कित्ती सारी काऊ दिखी, बचुआ?? इत्ता ध्यान से पढ़ रहे हो कि डिस्टर्ब करने की हिमात नहीं पड़ी!!
November 17, 2009 at 7:30 PM
सीरियस तो बहुत-ही हो आदित्य !
पढ़ना और पेटपूजा-साथ साथ !
November 17, 2009 at 9:16 PM
पापा से पूछो .. उन्होने इतनी कम उम्र में किताबे पढी थी या फाडी थी .. अभी खिलौनों से तुम्हें पढाएं .. किताबें पढने की उम्र है तुम्हारी ??
November 17, 2009 at 9:22 PM
Adi to bahut hi studious ho gaya hai..!
tumhari kitaben itni sundar lag rahi hain..mera bhi dil kar raha hai inhen padhne ko.
November 18, 2009 at 2:02 AM
किताब को फाड़ने में जो मज़ा है वह पढ़ने में कहाँ !
November 18, 2009 at 6:24 AM
इतनी पढाई अभी से ,
खेलोगे कूदोगे बनोगे नबाब
पढोगे लिखोगे बनोगे ..............
November 18, 2009 at 11:27 AM
काऊ काऊ पढ कर बेटा अग्रेज मत बन जाईयो, ओर धयान से पढ ओर खा भी कही ऊंगली काट ली खाते खाते तो....
November 18, 2009 at 11:39 AM
पढने का नई आदि..:)
रामराम.
November 18, 2009 at 5:28 PM
अरे अभी इतनी जल्दी किताबो के चक्कर में पड़ गया ? अभी तो इनसे खेलो जैसे विवेक अंकल ने कहा इन्हें फाड़ फाड़ कर खेलों बड़ा मजा आएगा :)
December 13, 2009 at 7:38 AM
अरे, पढ़ाई भी चालू हो गई? अभी तो खेलने-कूदने की उमर है तुम्हारी.. अभी से ये गंदी आदत मत पालो.. वैसे भी ये जीवन भर परेशान करेगा.. :)
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