मुझे मिल गई मम्मी की आई लाईनर... चित्रकारी करने के लिये और क्या चाहिये होता है? क्या कहा कैनवास? अरे घर में इतनी सारी जगह है.. और आप कैनवास की बात करते है... देखिये मेरी चित्रकारी का एक नमुना.. ये काम अभी शुरु ही किया है तो क्लेक्शन में ज्यादा आईटम नहीं है.. अभी तो इसे ही निहारिये
ज़रा औजार ठीक कर लूं..
और मम्मी का आदेश हुआ है तो रुई से साफ साफ भी करना पडेगा..
आपके घर की दीवारें सुनी सुनी तो नहीं है? बुला लो मुझे..
November 23, 2009 at 8:06 PM
वाह बेटा अब पिटाई होगी मैं तो चली आशीर्वाद्
November 23, 2009 at 8:27 PM
अब छोडो ये सफाई भी .. तुम्हारे भोलेपन का मम्मा फायदा उठा रही है .. तुम्हारा काम सिर्फ शैतानी करना है .. और मम्मा का काम उसे सुधारना .. जल्दी से दादी को फोन लगाओ !!
November 24, 2009 at 1:17 AM
अरे मम्मी को बोल इतनी सुंदर चित्रकारी को कोई मिटाता है, अरे कुछ सम्भाल कर भी रख ले, जब आदि बडा हो जायेगा तो देखे गा ना.
राम राम भाई आदि
November 24, 2009 at 1:39 AM
apne ghar kee deewaren to hamne chitro se saja rakhi hain. tere layak bachi hi nahin hai.
November 24, 2009 at 1:49 AM
डियर आदि
वाल पेंटिंग सब बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है , कोई कितना भी धमकाए डरना नहीं !
पेंटिंग्स जारी रहें !
November 24, 2009 at 2:55 AM
रंजन जी
आदि का बचपन और बचपना देखकर बच्चा बन जाने का मन करता है .
November 24, 2009 at 3:16 AM
wah ji...teri saari harkatein ham se milti hain..
gud..
bahut aage jayega....
November 24, 2009 at 4:52 AM
केनवास बड़ा है...चित्रकार भी.
November 24, 2009 at 8:13 AM
आदि अब तो आप शैतानों के सरदार बन गये हो!
November 24, 2009 at 4:48 PM
अगली बार लिपिस्टिक और नेल पॉलिस से करना..फिर देखेंगे मम्मी को..कैसे रुई से छुड़वाती हैं..छूटेगी ही नहीं...थोड़ा नेल पालिस मूँह पर पोत लेना..नहलाने में ही समझ आ जायेगा मम्मी को...बच्चे से भला कोई साफ कराता है ऐसे... :)
November 24, 2009 at 7:31 PM
हा हा हा हा हीरो दीवार कम पड़ रही हो तो फर्श भी है याद रखना और हाँ समीर अंकल की बात पर ध्यान देना हा हा हा हा
love ya
November 25, 2009 at 5:20 PM
आदि घर की एक भी दीवार बिना चित्रकारी के नहीं बचनी चाहिए !
December 13, 2009 at 7:40 AM
ye kaun chitrakaar hai vala geet yaad aa gaya hai..
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