तो एक बार में छुप गया अपनी हट में..
और बाकी का किस्सा इन तस्वीरों में...
खिड़की से मम्मी झांक रही है..
और ये मेरा प्यारा सा "त्या...."
फिर छुपाने की बारी...
और ये तांका झांकी..
और फिर प्यारा सा.. "त्या...."
देखें अब कौन आ रहा हे?
त्या........
बस भाई बहुत हुआ.. कल मिलते हें..
(तस्वीरें १५ अगस्त की)
पसंद आया? खेलोगे मेरे साथ.. त्या..
October 30, 2009 at 10:41 PM
भई हम भी खेलेंगे तुम्हारे साथ.. त्या..
October 30, 2009 at 11:42 PM
छो...स्वीट....त्या...मिष्टी की हरकतें याद आ गयी...
नीरज
October 31, 2009 at 12:49 AM
बहुत अच्छे, ऐसे ही खेलते कूछते रहो।
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स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाती तकनीक।
चार्वाक: जिसे धर्मराज के सामने पीट-पीट कर मार डाला गया।
October 31, 2009 at 1:22 AM
यार आदि एक हट का इंतजाम अपने लिये भी करवा भाई. या फ़िर तेरी हट मे ही जगह देदे..दोनो मिलकर मस्ती करेंगे और कहानी सुनेंगे. त्या?:)
रामराम.
October 31, 2009 at 3:14 AM
बहुत पसंद आया बेटा यह खेल तो, ओर चित्र भी बहुत सुंदर
October 31, 2009 at 3:57 AM
वाह...!
आज तो तुम्हारा खेल देखकर मन प्रसन्न हो गया!
October 31, 2009 at 5:38 AM
वाह बेटा..त्या!!! :)
October 31, 2009 at 6:41 AM
देखा आज फिर छुपा हुआ आदि ब्लॉग पर मिल गया यानि ढूंढ़ लिया त्या!!! त्या!!! त्या!!! त्या!!!
October 31, 2009 at 7:34 AM
chhupachhupi o chhupi aagad-bagad jaee re
choohe mama o mama bhag billi aaee re
billi boli myaoon kahe ghabarao
main to chali kashi gale mil jao
October 31, 2009 at 7:34 AM
chhupachhupi o chhupi aagad-bagad jaee re
choohe mama o mama bhag billi aaee re
billi boli myaoon kahe ghabarao
main to chali kashi gale mil jao
October 31, 2009 at 9:40 AM
ध्यान से बेटा...अंदर-बाहर होते समय ध्यान रखना..गिरने का डर रहता है
November 2, 2009 at 11:35 PM
त्या.. :D
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