- दिपावली को मैनें खुब अनार जलाये.. आकाश में जाकर रंगबिरंगी रोशनी करने वाले राकेट मुझे बेहद पसंद आये... और मैं "ब्भम" बोलना सीख गया.. गिर जाऊ तो भी "ब्भम" और पटाखा जले तो भी "ब्भम".. लेकिन इस मजे में मैंने दीपक पर अंगुली लगा दी तो सीधे हाथ की एक अंगुली में फफोला हो गया.. दो दिन दवा पी और मलहम लगाया तो ठीक हुआ..
- जोधपुर में मैंने काऊ भी देखी.. पहले तो मैं उसे भी "भौ-भौ" ही समझा पर फिर मम्मी ने मुझे समझाया की ये "काऊ" है.. फिर क्या है "काऊ" या "गाय" देखना मेरा प्रिय शौक बन गया.. और जब भी घर में मन नहीं लगता तो पापा या चाचा की गोदी में सवार होकर चला जाता गाय देखने..
- ऋषभ भैया का झडोला 16 तारिख़ को हुआ था.. झडोला के समय तो में सो रहा था पर बाद में हमने खूब मस्ती की..
आगे आगे मैं चला पीछे ऋषभ भैया...
- पता है पापा जकार्ता में है.. पापा ने मेरे लिए एक डुगडुगी खरीदी है.. पापा ने मुझे विडियो काल कर डुगडुगी दिखाई.. और मैं उसे पकड़ने के लिए बैचेन हो गया.. बार बार कंप्यूटर की स्क्रीन पर हाथ मार डुगडुगी पकड़ने की कोशिश करता रहा पर ..:) आपके पास कोई तरिका हो तो बताओ..
October 26, 2009 at 7:06 PM
अब देख आदि आजकल पापा तेरे बारे में कुछ नहीं बता रहे है ये तुने बढ़िया किया जो सभी बाते आज बता दी | अब जल्दी और बड़ा हो जा और अपनी बाते हमें खुद बता | पापा पर कब तक निर्भर रहेगा ?
October 26, 2009 at 8:09 PM
ओये हीरो आज तो बहुत दिनों बाद नज़र आये.....ओये बहुत मिस किया हमने अपने छोटे से हीरो को......अब तो भागने दोड़ने भी लगे हो बहुत अच्छा लगा तुमसे मिल कर...
love ya
October 26, 2009 at 8:52 PM
वक़्त बदल रहा है बेटा.. जब हम छोटे थे तब काऊ गौ माता होती थी.. अब तो काऊ हो गयी है.. :)
हाँ लेकिन डुगडुगी तब भी डुग डुगी ही होती थी और अब भी है.. जैसे गाडोला अभी भी गाडोला..चलाते हो या नहीं ?
October 26, 2009 at 8:52 PM
बेटा जल्दी जल्दी मिला करो . बहुत दिनों से दिखे नहीं इसलिए बेचेनी सी थी अब ठीक है .
October 26, 2009 at 8:55 PM
अरे वाह आदि की डुगडुगी आने वाली है...पापा कब आयेंगे??
खूब बड़े हो रहे हो जल्दी जल्दी...हम सुबह फिर आकर यहाँ देखेंगे..अभी बहुत रात हो गई है.
October 26, 2009 at 9:31 PM
अरे यार बड़े होने में बहुत टाइम लगा रहे हो. हमतो सोच रहे थे की तुम नर्सरी में दाखिला ले लिए होगे. अच्छा अब तुम्हारा भी मुंडन होगा न? बड़े बड़े बाल हो गए हैं.
October 26, 2009 at 10:17 PM
वाह आदि बहुत दिन बाद देखा है तुम्हें आब तो बडे हो गये हो। शरारती भी बहुत बहुत आशीर्वाद्
October 26, 2009 at 10:51 PM
belated happy diwali
खुबसुरत डुगडुगी...
October 26, 2009 at 11:00 PM
hello...aadi...hw r u?
October 26, 2009 at 11:50 PM
अरे प्यारे अपने पापा को कहो कि एक डुगडुगी हमारे लिये भी लायें। ब्लॉगिंग में बहुत बजानी होती है।
October 26, 2009 at 11:54 PM
अरे प्यारे अपने पापा को कहो कि एक डुगडुगी हमारे लिये भी लायें। ब्लॉगिंग में बहुत बजानी होती है।
October 27, 2009 at 12:14 AM
अरे यार आदि तू कहां छुप जाता है इत्ते इत्ते दिन? पापा को फ़ोन लगाओ तो मिलता नही. पोस्ट में सूचना तो जकार्ता से भी दी जा सकती है. चल अब एक डुगडुगी हमारे लिये भी मंगवा लेना.:)
रामराम.
October 27, 2009 at 12:48 AM
आदि बेटा।
तुम्हें तो रोज ढूँढते हैं ब्लॉग पर।
आज दिखाई दिये हो तो बधाई तो ले ही लो।
October 27, 2009 at 3:07 AM
अरे आदी बाबा तो बहुत दिनों बाद दिखे हैं.. और लगता है कि खूब मस्ती हुई है..
अच्छा आदी बाबा, आपने कभी म्याऊं देखी है? या बस भौं में ही खुश हो? अपने पापा को बोलना चेन्नई लाने के लिये, यहां पीडी कक्का के घर पर एक म्याऊं रोज आती है.. :)
October 27, 2009 at 6:16 AM
बहुत सुंदर बेटा तुम्हारी काऊ मेडम कही हमारी गाऊ माता तो नही? अबे सुन मेरे पास एक तरीका है तेरी डुगडुगी मंगवाने का.... पापा को बोल पोस्ट से जल्द भेज दे.
प्यार
October 27, 2009 at 10:45 AM
आदि, डुगडूगी तो तू बजा लेगा पर उस पर nachaega kisko ? वो कविता नहीं सुनी ,'बजी डुगडूगी नाचा बन्दर .....'
October 27, 2009 at 6:31 PM
डुगडुगी बजा बजाकर नाचो आदि ।
बचपन का मज़ा लो ।
शुभकामनाएं ।
October 27, 2009 at 10:00 PM
oh oh! choti si ungli mein dard hua hoga na... koi baat nahi... tumhari mammi sab thik karna jaanti hai... dugdugi to bahut sundar lag rahi hai- Pallavi maasi
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