कैसा लगा?
शरारत ऑफ द डे कल शाम को पापा के साथ घूम कर आ रहा था तो लिफ्ट में एक अंकल मिल गये... अंकल अपनी धून में मस्त थे.. जेब से एक क्लोरोमिंट निकाली और खा ली.. मैनें तुरंत अपना विरोध जताया.. अंकल भी समझ गये.. जेब से एक क्लोरोमिंट निकाली और मुझे दे दी.. और मैने बदले में दी एक प्यारी सी स्माईल... दूबारा मत पुछना... |
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September 22, 2009 at 7:36 PM
बहुत बढ़िया आदित्य जी।
अच्छा का ढूँढ लिया है तुमने तो।
September 22, 2009 at 8:08 PM
हा हा हा हा हा ओये हीरो मजा आ गया .
love ya
September 22, 2009 at 8:15 PM
अंकल भी समझ गये.. जेब से एक क्लोरोमिंट निकाली और मुझे दे दी.. और मैने बदले में दी एक प्यारी सी स्माईल... दूबारा मत पुछना...
बहुत होशियार हो गए हो :)
September 22, 2009 at 8:19 PM
abhi to kai sitiyo se man dolega
September 22, 2009 at 8:56 PM
वाह कूकर की सीटी मे आदि का मन डोले...छा गया गुरु..छा गया.
रामराम.
September 22, 2009 at 9:03 PM
This is awesome!
September 22, 2009 at 9:17 PM
सीटी क्या तुम्हारा तो कुकर पर ही मन डोल रहा लगता है :-)
September 22, 2009 at 9:48 PM
हा-हा, होनहार विरवान के, होत चिकने पात, शुभकामनाये आदित्य !
September 22, 2009 at 9:51 PM
ए बच्चे !
कुकर कैसे फिट होता है यह तो कुछ ज्यादा ही सीख लिया तुमने :)
September 22, 2009 at 10:08 PM
मस्त है आदित्य बहुत मस्त . और हां दुबार नहीं पुछुगा :)
September 23, 2009 at 3:35 AM
:) बहुत प्यारी है आपकी स्माइल और कुकर फिट करने का तरीका भी :)
September 23, 2009 at 3:51 AM
वाह बेटा,मजा आ गया तुम्हारी शरारते देख कर, लेकिन कभी हाथ मत लगा लेना गर्म गर्म कुकर को. प्यार ओर बहुत सा प्यार
September 23, 2009 at 4:45 AM
देखते देखते कितना कुछ सीख गया और भारी सामान भी उठाने लगा.
एक क्लोरोमिंट हमारी तरफ से भी.. :)
September 23, 2009 at 5:47 AM
आदि बड़ा हो गया है हमारा...वाह...अपने से भारी कूकर उठा रहा है...कहीं संजीव कपूर सा भोजन विशेषग्य तो नहीं बनेगा भविष्य में...??क्या इरादा है जनाब का?
नीरज
October 15, 2009 at 1:19 AM
नहीं गुरूदेव.. दुबारा नहीं पूछेंगे.. :)
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