अंकल मेरे लिये एक खिलौना लाये.. ये प्यारा सा खिलौना बोलता था.. (जी हाँ ’था’) हैलो, हैलो, डैडी, डैडी... आई लव यू,.. टिविकंल टिविकंल लिटल स्टार... मुझे ये खिलौना बहुत पसंद आया.. और दिन भर इसे लेकर घुमता था... ये बजता रहता.. डांस करता रहता और मैं खुश होकर उसे देखता रहता..
ये देखे राखी वाले दिन ये खिलौना कैसा दिखता था..
देखो कितने प्यार से खेलता था इससे...
और अब देखो क्या हालत है इसकी...
विवेक अंकल ने कहा था "खिलौना मँहगा हो या सस्ता, एक ही दिन में हो खस्ता"
तो उनके कहे अनुसार इसकी हालत तो आप देख ही रहे है.. अब ये आवाज नहीं करता.. डांस नहीं करता.. पर मुझे तो डांस देखना होता है न?
तो मैं इसे लेकर पापा मम्मी के पास पहुँच जाता हूँ और वो इसे डांस करवा कर और गाकर मेरा मन बहलाते हैं..
कैसे लगी मेरी ये शरारत?
August 11, 2009 at 7:01 PM
भई भतीजा हो तो ऐसा आज्ञाकारी :)
August 11, 2009 at 7:33 PM
आदि की शरारतें तो हमेशा ही प्यारी-प्यारी होती हैं।
August 11, 2009 at 7:38 PM
मंहगा सस्ता का टेंशन पापा पर छोड़ दो...लगे रहो ..ऐसे ही इंजीनीयर थोड़े बना जाता है...अगला नंबर किसका है ...
August 11, 2009 at 7:50 PM
चाहे कितना ही प्यारा हो,
मँहगा हो या सस्ता हो।
मेरे हाथों में आते ही,
इसकी हालत खस्ता हो।
लगे रहो आदि!
बाप का ही तो माल है।
August 11, 2009 at 7:58 PM
कुछ ज्यादा ही प्यार कर डाला.:)
रामराम.
August 11, 2009 at 8:23 PM
रदि बहुत शरारती हो गए हो बेटा कमाओगे तो पता चलेगा आशीर्वाद्
August 11, 2009 at 8:39 PM
सही है भाई...चाचा की बात खूब मान रहे हो बेटा जी
August 11, 2009 at 8:50 PM
aadi jindabaad
August 11, 2009 at 9:07 PM
इस नामुराद खिलौने का तो यही हश्र होना था....:)
August 11, 2009 at 9:16 PM
bhai maza aa gya....bahut badhiya...purana nahi tootega to naya kaise aayega.
August 11, 2009 at 9:36 PM
हा हा हा हा हा ओये हीरो इतना भी प्यार अच्छा नहीं है न.......चलो जाओ माफ़ किया हा हा हा
love ya
August 12, 2009 at 12:57 AM
waah badhiya jaa raho ho aadi baba,:)ab naya khilona aa jayega:)
August 12, 2009 at 2:28 AM
खेल खेल में ऐसा तो हो ही जाता है.
August 12, 2009 at 3:10 AM
Naughty Boy?
{ Treasurer-S, T }
August 12, 2009 at 3:33 AM
वाह भई वाह महंगाई वहंगाई की चिंता करें चिंता करने वाले हमें तो खिलौने चाहिएं तो चाहिएं अब उन्हें चाहे एक दिन में तोड दें या रहम खाकर दो चार दिन खेलें ये तो हमें देखना हे यही तो बचपन है तमाम उम्र में सबसे हसीन उम्र
August 12, 2009 at 4:06 AM
आदि की प्यारी-प्यारी शरारतें मुझे अच्छी लगती है. आदि बाबा लगे रहो :-)
August 12, 2009 at 4:10 AM
जीवन भर महंगा सस्ता सोंचना ही है .. अभी जमकर मजे करो !!
August 12, 2009 at 5:32 AM
koi baat nahi.....ab tod diya toh naya aa jayega......
aakhir nayi chizen mangane ke liye purani wali todni padti hai..
aur phir nayi ki demand karni padti hai....
ab tu khopadi toh hai hi....
samajh gaya na ishara....
aur kisiko batana nahi....ki maine aise kaha tha....
nahi toh daddy ji mujhe....
August 12, 2009 at 6:34 AM
वाह क्या हालत कर दी रे इसकी आदि :)
August 12, 2009 at 12:55 PM
Aadi----- Since you have broken your dancing guy.....I suggest you check out my post......
I just did a post on newly learnt dancing habit of mine...so why don't you tell papa to play that video for u...me dancing with my Rudra bhai and Ridhima didi.....
http://reveda.blogspot.com/2009/08/me-in-dehradun-vide-pictures.html
You seem to be another dynamite in town!
August 17, 2009 at 2:58 AM
जियो गुरू!! ऐसे ही घर में हर दिन बवाल मचाते रहो.. ;)
August 19, 2009 at 7:22 PM
बाप रे बाप..यह हश्र!!
Post a Comment