ये देखो मैं भुजिया खा रहा हूँ.. और बिट्टु के सामने भी एक भुजिया रखा है..
ये लो बिट्टु तुम भी खाओ...
अच्छे से मुँह खोलो...
दे देखो शरारती हँसी..
और बिट्टु भी खुश...
पसंद आया...
| सूचना आज अर्पित चाचा का जन्मदिन है और मैं उनका जन्म दिन मनाने चंडीगढ़ जा रहा हूँ.. कुछ दिन वहीं रहूँगा.. और चाचा के साथ खुब मस्ती करूगां.. |
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August 20, 2009 at 8:22 PM
ओये हीरो हमे भी खानी है भुजिया खूब शरारती हो गये हो आजकल. अपने अर्पित चाचा जी को हमारी तरफ से भी जन्मदिन की शुभकामना देना ओके.....भूलना नहीं.....
love ya
August 20, 2009 at 9:17 PM
इत्ती जल्दी मेहमानबाजी भी सीख ली .. फिर मुझे दोस्त बना लो न .. मुझे भुजिया पसंद है !!
August 20, 2009 at 9:34 PM
मुझे भी भूख लगी है।भुजिया बहुत टेस्टी लग रही है।चाचा को मेरी ओर से शुभकामनाएं दे्ना।
August 20, 2009 at 10:39 PM
Hey Aadee have a safe journey and happy b day to your chacha....
Those are lovely pictures of you and your friend....
And do you know while u were busy giving ur friend bhujia, your unseen friend, Reveda was busy learning the tricks to get on and off her bed.....
August 21, 2009 at 1:22 AM
अरे वाह ! आखिर मेहमानबाजी की जोधपुर वाली परम्परा निभाना सीख ही गए | "पधारों म्हारे देश " |
August 21, 2009 at 1:42 AM
नये दोस्त से मिलवाने का शुक्रिया!
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मानव मस्तिष्क पढ़ना संभव
August 21, 2009 at 1:49 AM
vah.. aise hi mil jul kar rahna.. :)
August 21, 2009 at 1:50 AM
और हां.. चाचा को मेरी बधाई दे देना.. :)
August 21, 2009 at 2:14 AM
चल भई आदि. हमारी बधाई भी अर्पित चाचा को पहुंचा देना. और वहां से भी जाकर चिट्ठी पत्री लिखते रहना.
रामराम.
August 21, 2009 at 5:12 AM
अरे वाह रे मेरे शर्मीले बबुआ! ये कलर..बहुत खूब!! टॉफी भी खिलाओ बिट्टू को.
बधाई अर्पित चाचा को.
August 21, 2009 at 6:43 AM
राजस्थान की तो भुजिया है ही मशहूर . बीकानेर की नानाजी की भुजिया .
August 21, 2009 at 6:46 AM
अच्छी है मेहमानवाजी।
अर्पित चाचा को अपने हाथों से केक खिलाना मत भूलना।
August 21, 2009 at 7:35 AM
हमें भी भुजिया की तलब हो रही है. मेहमानवाजी करना कोई तुझसे सीखे. ढेर सारा प्यार.
August 21, 2009 at 7:54 AM
aadi bhai aap ne to nayab tarika nikal hai swagat ka
August 21, 2009 at 8:35 AM
अरे ये बिट्टू इतनी जल्दी खड़े होने लगी, अभी दो महीने पहले जब आपने हमसे इसका परिचय कराया था तब से ये पेट के बल पड़ी रहती थी।
सच कहते हैं लड़कियां बड़ी जल्दी बड़ी हो जाती है।
और हां भई आदि आप तो बड़े मेहमाननवाज निकले, एक!!! भुजिया से उसका स्वागत किया!! मन गद्गद हो गया।
August 21, 2009 at 8:51 AM
ओह!
तुम दोनों तो सारे लड्डू खा गये।
अंकल के लिए कुछ भी नही छोड़ा।
August 21, 2009 at 9:15 AM
aadi baba waah,mehmaan nawazi bhi sikh liye,bahut khub,bittu se milwaye,bahut pyari dot hai aapki;):),auraapki shararati muskan,wallah ,sadke jawa.
August 21, 2009 at 11:21 PM
अर्पित चाचा जी को हमारी भी बधाई कहना जी !
August 22, 2009 at 7:21 AM
दिल बड़ा है तुम्हारा। भुजिया का एक टुकड़ा ही दिया तो क्या?! :)
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