वैसे मेरे बाल बनाना कोई आसान काम नहीं है.. कम से कम तीन कंघे तो चाहिये ही.. वो इसलिये कि दो तो मेरे दोनों हाथों में खेलने के लिये.. और एक से आप बाल बनाओ..
जनमाष्टमी की सुबह जब नहा कर आया तो दादा ने सोचा कि आज आदि की चोटी बनाते हैं.. तो मैने भी सोचा चलो आज दादा तो ट्राई करने देते है और शराफत से बाल बनवाने लगा.. और तो और कंघा भी खुद ही दादा को दे दिया..
पसंद आया दादा पोते का ये खेल!!
August 18, 2009 at 4:02 AM
क्या आनन्दमय दृश्य हैं! वाह!
August 18, 2009 at 5:33 AM
दादा भी खुश और पोता भी...ये ख़ुशी दादा बने बिना महसूस नहीं की जा सकती...
नीरज
August 18, 2009 at 6:29 AM
दादा के सामने कोई भी बच्चा शरारत कम ही करता है इसीलिए तुमने भी बाल आराम से बनवा लिए |
August 18, 2009 at 7:30 AM
dadaji ke saath aadi waah,bahut khush lag rahe hai dono bhi,ye pyar yuhi barkaraar rahe.
August 18, 2009 at 8:21 AM
aadi bhai dada aur nai ,so good expresion
August 18, 2009 at 8:57 AM
मेरे पापा से सब डर के मारे बात नहीं करते लेकिन मेरी बेटी को सभी अधिकार है कुछ भी करने का
बेटा मूल से सूद प्यारा होता है
August 18, 2009 at 9:08 AM
तो दादा ने खूब दुलार किया आपका... मैं भी नेक्स्ट मंथ जा रही हूँ अपने दादा दादी से मिलने.... फिर मैं भी बताउंगी सारी बातें :-)
August 18, 2009 at 9:15 AM
दुलार और कंघी एक साथ! वाह!
August 18, 2009 at 10:05 AM
हम तो बाढ़ से परेशान हैं,
मगर आदि बेटा को
बधाई तो दे ही देते हैं।
August 18, 2009 at 7:23 PM
वाह आदि आनंदम आनंदम.
रामराम.
August 19, 2009 at 8:13 AM
आदि, कभी मत भूलना कि तुम्हारे सुंदर बालों को कब-कब किसने संवारा। ऐसे ही छूने भर से संवर जाती है जिंदगी भी। है ना!
August 19, 2009 at 8:21 AM
बहुत अच्छा प्रयास
August 19, 2009 at 3:04 PM
Wahhhe Aditya Bhaiya...ye hui na acchhhon bachhon wali bat.
August 19, 2009 at 5:54 PM
बहुत सुंदर तस्वीरें! मुझे तो अपने दादाजी की याद आ गई!
मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com
August 19, 2009 at 7:15 PM
गजब!! दादा तो गदगदायमान होंगे..जिओ मेरे लाल!!
August 19, 2009 at 9:00 PM
ओये हीरो ये दादा पोते का खेल मजेदार लगा....बहुत मजा आया सच आदि...
love ya
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