वैसे तो टेलिफोन का आविष्कार बहुत पहले ही ’बेल’ अंकल ने कर दिया था.. पर एक दिन मैने और पापा ने इसे फिर से ट्राई किया.. सोचा क्या ये वाकई काम करता है.. हुआ यूँ कि एक दिन शाम को पापा पाईप से पानी भर रहे थे... और जो चीज पापा मम्मी के पास हो तो वो तो मुझे चाहिये ही.. तो मैं पाइप का एक सिरा पकड़ रवाना हो गया.. और पापा दुसरे तो पकड़ मेरे पीछे पीछे.. और इसे खेलते खेलते हमने टेलिफोन भी ट्राई कर डाला..आप भी देखिये हमारा टेलिफोन वाला खेल
हेलो, हेलो, पापा, पापा क्या आपको मेरी आवाज आ रही है...
आई न..
हाँ मैं भी आपको सुन पा रहा हूँ...
हाँ इस कान में भी आवाज आ रही है..
आप बोलो.. मैं सुन पा रहा हूँ..
एसे हमारा खेल चलता रहा.. मैं पाईप लेकर आगे आगे और पापा मेरे पीछे पीछे..
कैसा लगा हमारा ये खेल..आज जोधपुर से मेरे दादा आये है.. मेरे साथ खेलने.. मेरे लिये कान्हा कि ड्रेस भी लाये है... कान्हा कि ड्रेस क्यों.. अरे भाई आज जनमाष्टमी है.. और मैं भी तो कान्हा बनुंगा..
आप सभी तो जनमाष्टमी की शुभकामनाऐं
August 13, 2009 at 8:36 PM
पहले पता होता फ़ोन इतना सस्ता भी हो सकता है तो कुछ मीटर पाइप ही खरीद कर रख लेते हीरो, पहले क्यों नहीं बताया????ओये हीरो , कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना और ढेरो बधाई . कान्हा बन कर जल्दी से आना और हमको अपनी तस्वीर दिखाना .
love ya
August 13, 2009 at 10:03 PM
अच्छा है .. तेरे बहाने पापा भी बचपन की यादें ताजा कर रहे हैं !!
August 13, 2009 at 10:10 PM
बहुत मज़ा आया तुम्हारा टेलीफोनिक किस्सा पढ़कर. वाह!
August 13, 2009 at 10:10 PM
बहुत मज़ा आया तुम्हारा टेलीफोनिक किस्सा पढ़कर. वाह!
August 13, 2009 at 10:49 PM
वाह क्या खोजा है वट एन आइडिया सर जी :) गुड गुड ..जय श्री कृष्ण
August 13, 2009 at 11:21 PM
tu bhi "bha" ki tarah engineer banne wala hai....lage raho...
ca ki fauz toh khadi ho hi gayi....
par ab saare mere under main engineers banenge......
aao aao...
bharti chalu hai.....
August 13, 2009 at 11:40 PM
अरे वाह ये खेल तो हमने भी बचपन में खूब खेला
है ।
August 13, 2009 at 11:59 PM
एक काम करो आदि भैया । तुम्हारे शहर से हमारे शहर के बीच पाईप बिछा लो । हम उसी से बात किया करेंगे । है ना :D हमारी एक्स्क्लूसिव टेलीफोन लाइन होगी वो ।
August 14, 2009 at 1:05 AM
आदि बेटा, खेल-खेल में ज्ञान की बातें सीखते जाना।
August 14, 2009 at 1:41 AM
वाह...क्या बात है। हमें भी बचपन याद आ गया।
खूब खुश रहो...ऐसे ही मजे़ मज़े मे बढ़ते रहो
जय श्रीकृष्ण
August 14, 2009 at 2:18 AM
बच्चू ऐसे ही खेल खेल में बहुत कुछ सीखा जाता है खूब मौज करो ! और अब तो दादा दादी आये हुए है उनके साथ खेलो ! सबसे ज्यादा खेलने का मजा दादा दादी के साथ ही आता है |
August 14, 2009 at 5:05 AM
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। लगे रह प्यारे.
रामराम.
August 14, 2009 at 5:32 AM
आदि बेटा बढ़िया आविष्कार किया है।
नेट भी चल जायेगा ना इससे तो....
श्री कृष्ण जन्माष्टमी और स्वतन्त्रता-दिवस
की हार्दिक शुभकामनाएँ।
August 14, 2009 at 7:06 AM
अरे वाह !! भाई अपनी इस टेक्नोलॉजी का ज्ञान कुछ हमारे ऑफिस के इंजीनियर्स को भी दो.
August 14, 2009 at 7:23 AM
रोज़ मेरा बचपन याद करने के लिए शुक्रिया .
August 14, 2009 at 9:22 AM
कान्हा, खूब धमाल करो और दादा के साथ मस्ती करो.
ये वाला टेलीफोन भी बढ़िया काम करता है:)
August 14, 2009 at 11:39 AM
ऐसे ही गुदगुदाते रहिए बचपन को.. जन्माष्टमी की बधाई स्वीकारें।
August 14, 2009 at 8:27 PM
जियो! भारत के लिये नोबल पुरस्कार की आशायें बनती हैं!
August 17, 2009 at 2:56 AM
अरे आदि बाबा.. एक लाईन अपने पापा को बोल कर मेरे लिये भी बिछा दो ना..
August 19, 2009 at 7:20 PM
मजेदार!!
इसी फोन पर अब तुमसे बात होगी जब आवेंगे!!
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