ताऊ की क्लास में क्या नहीं गया.. ये रामप्यारी तो मेरे घर पर आ गई.. अब बताओ मेरे तो खेलने के दिन है न? और ये मुझे सिखा रही थी २ टु जा २२.. लेकिन जब घर पर आई तो पता है बिल्कुल अलग थी.. शायद ताऊ के इफेक्ट से बाहर आ गई थी.. और ये रामप्यारी तो मुझे "हैप्पी बर्थ डे" बोल कर सिखाती है.. बस थोड़ा सा दबाना होता है..
जब सभी खिलौने से बोर हो गया तो मम्मी से अलमारी खोल मेरे लिये नये खिलौने निकाले.. रंग बिरगें बन्दर भालु
लेकिन पता है मेरी दिलचस्पी इन सभी में नहीं थी.. मुझे तो ये ही ज्यादा पसंद आया
इस डिब्बे में मेरे पुराने खिलौने है.. और मुझे ये ही ज्यादा पसंद आये... और जब बारी आई "सॉफ्ट टाय़ज" लेने कि तो मैनें चुना मेरा सबसे पुराना दोस्त... ये कछुआ
और इस प्यारे कछुए को लेकर पहुँच गया अपने झुले पर..
रुकना अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुँचना.. मुझे कछुए से ज्यादा उसकी आँख पसंद है.. और एक आँख तो कब कि गायब हो चुकी.. एसे..
(सभी चित्र १७ और १८ जुन के है)
July 6, 2009 at 7:30 PM
आदि का यह ब्लाग सब को बचपना सिखा रहा है।
July 6, 2009 at 7:44 PM
ओए, कछुऐ की आँख खाओगे क्या?? छोड़ो उस बेचारे को...टमाटर खओ, ताकत आयेगी.
July 6, 2009 at 8:16 PM
ओये हेरी इनने सारे खिलोने मुझे मुझे भी चाइये और रामप्यारी तो बेहद खुबसूरत हो गयी है.....लगता है किसि ब्यूटी पार्लर का कमाल है हा हा हा
love ya
July 6, 2009 at 8:28 PM
वाह क्या खूब बचपन का उपहार दे रहे हैं आदित्य तुम्हारे पापा ।
July 6, 2009 at 9:05 PM
वाह यार आदि, एक आंख तो उसकी तेरे पेट मे पहले ही जा चुकी थी अब दुसरी को खाते हुये भी साफ़ दिख रहे हो. अब तेरी शिकायत तो रामप्यारी मैं से करनी ही पडेगी.:)
रामराम.
July 6, 2009 at 9:11 PM
आदि भई रामप्यारी को आप ने बदल दिया कही ताउ बिगड न जाय
July 6, 2009 at 9:58 PM
अरे...
सम्हाल के आदि,
कहीं रामप्यारी की आँखे मत निकाल लेना।
July 7, 2009 at 12:19 AM
खूब संभल के रक्खे है तुमने अपने खिलोने...बहुत अच्छे बच्चे हो तुम...ये वाली राम प्यारी तो ताऊ वाली राम प्यारी की बहिन लग रही है...
नीरज
July 7, 2009 at 1:57 AM
अरे पलटु बडे सुंदर खिलोने रखे है तुने तो. ओर यह राम प्यारी भी आ गई लेकिन सब से सुंदर ओर प्यारा तो हमारा पलटू महाराज है जी
बहुत प्यार
July 7, 2009 at 1:59 AM
बहुत बढ़िया बेटा, वाह!
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चाँद, बादल और शाम
July 7, 2009 at 2:01 AM
yaar....
kya shandar collection hai khiloono ka.....
aur tu aajkal khub kuchmaidi kar raha hai....
acha hai..
tu ab phataphat yahan aaja..
jid kar le ..
ki jodhpur jana hai...
khub masti karenge...
aur kaku bhaiya ko congrats..
blog dino din kafhi interesting ho raha hai...
comment likne ke liye khub dimag lagana padta hai...
aur itne ache ache comments padhne ke baad..
type kar wapas delete marna padta hai...
July 7, 2009 at 5:31 AM
वाह, यह तो राम जी को भी प्यारी लगेंगी सब चीजें!
July 7, 2009 at 6:41 AM
वाह, आज तो खरगोश की गोद में कछुआ। खूब झूले झूलो बिटुआ।
July 7, 2009 at 7:31 AM
अरे आदित्य आँख खा रहा है या नाक चबा रहा बता दे सबको .
July 7, 2009 at 10:20 AM
इतनी तरतीब से रखे खिलौने? आदित्य कहीं सो रहे हैं क्या?
July 7, 2009 at 10:26 AM
are sare khilaune thik se rakhe huye hain.. ye to Aadi ka ghor apman hai.. jaldi se thik karo un khilauno ko.. mera matlab pheko idhar-udhar.. :)
July 7, 2009 at 11:40 AM
Shooooooooo shweeettttttttttt!
July 7, 2009 at 5:11 PM
badiya hai raam pyari :)
July 7, 2009 at 11:41 PM
अरे वाह आदि इतने सारे खिलौने ....!! :)
July 8, 2009 at 9:39 PM
वाह बेटा इतने खिलोने जी चाहता है मैं भी तुम्हारी तरह छोटी सी बच्ची बन जाऊँ आशीर्वाद्
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