पता है दादी दिल्ली आई थी.. हाँ पिछले बुधवार (८ जुलाई) को पापा बहुत दिनों बाद दिल्ली आये और उसी दिन मम्मी को भी बाहर जाना था.. पापा बड़ी असमंझस कि स्थिति में थे.. कुछ नहीं सुझा तो तुरंत दादी को फोन लगाया और और दादी शाम की ट्रेन में बैठ गुरुवार कि सुबह दिल्ली आ गई.. है न मेरी दादी प्यारी..
धीरे धीरे दादी से दोस्ती भी हो गई और कल शाम दादी के वापस जाने से पहले उनके साथ खुब मस्ती की..
दादी के साथ कानिया मानिया कुर्र वाला खेल खेला...दादी मेरे कान के पास आकर जोर से कुर्रर किया और मैने इस गुदगिदी का खुब मजा लिया.. और तुरंत दुसरा कान आगे कर दिया..
बडा़ मजा आया दादी के साथ खेल कर.. इसके बाद एक और खेल भी खेला.. वो बताऊगां कल..
मजा आया.. गुदगुदी हुई!!
July 14, 2009 at 10:25 PM
ओये हीरो..............दादी के साथ सच मे बहुत मजा आया.....काश हम भी आदि की उम्र के हो जाएँ है न....
love ya
July 14, 2009 at 10:44 PM
हमें ललचा ललचाकर खुद इतने मजे करते हो !!
July 14, 2009 at 10:46 PM
aare waah aadi aur dadi dono milke khub maze kar rahe hai,bahut khub,vaise dadi ji ki aachanl chav mein aap lag bahut pyare rahe ho.aapki dadi ji ko hamara pranam kahe.
July 14, 2009 at 11:45 PM
खुब मस्ती करते रहो मेरे दोस्त
आभार/शुभकामनाओ सहित
हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर
July 14, 2009 at 11:56 PM
दादी होती ही ऐसी है...मजेदार...प्यारी सी...
नीरज
July 15, 2009 at 1:03 AM
क्या जोड़ी है आदि और दादी की।
बहुत खूब भई.. ददी को ऐसे और बहुत से खेल आते हैं, जब तक यहां रहे सब सीख लो बाद में मम्मी आये तब उन्हे भी सिखा देना।
:)
July 15, 2009 at 1:03 AM
हम चचेरे भाइयों सहित सात भाई हैं , बचपन में अम्मा की गोद में बैठने को लेकर बहुत झगड़ते थे !
July 15, 2009 at 1:23 AM
वाह बेटे..ऐश करो..पर दादीजी को हमारी प्रणाम तो कह देना. इत्ता सा काम तो कर ही देगा तू?
रामराम.
July 15, 2009 at 1:33 AM
वाह वाह इतना सारा प्यार मिला, बड़े ख़ुशक़िस्मत हो।
July 15, 2009 at 1:41 AM
मस्ती के दिन हैं, मस्ती तो करोगे ही. लेकिन बेवकूफ भी खूब बनाते हो. तुमने कहा की दूसरा कान भी आगे कर दिया. सरासर गलत. फोटो झूट बोलेगा
क्या? दादी से मिलवाये इसके लिए एक आइसक्रीम हमारी तरफ से.
July 15, 2009 at 2:36 AM
सुब्रमनीयम अंकल..
ये सरासर पापा कि गल्ति है.. एक तरफ से ही तस्विरें ले रहे थे.. अगर थोड़ा घुमते तभी तो दुसरी तरफ से अच्छी फोटो आती.. अच्छा किया आपने पकड़ लिया..
July 15, 2009 at 2:40 AM
दादियां नानियां भगवान बनाते ही इसी काम के लिये हैं - कानिया मानिया कुर्र के लिये! :)
July 15, 2009 at 2:43 AM
khoob maze kar rahe ho beta ji...mann bhi nani ke saath khel (chiriya udi.....) karta hai...
July 15, 2009 at 3:03 AM
वाह....
हम भी अपने पौत्र-पौत्री के साथ
ऐसे ही खेलते हैं।
क्या तुम
हमारे साथ भी खेलोगे आदि बेटा!
July 15, 2009 at 3:19 AM
वाह, दादी से घुलमिलकर खेल रहा है:)
July 15, 2009 at 4:20 AM
वाह!! दादी के साथ खेला जा रहा है, मजे हैं भई.
दादी को हमारा भी चरण स्पर्श कह देना.
July 15, 2009 at 6:45 AM
आदि दादी के साथ तो खेलने व बड़े होने पर कहानियां सुनने में बड़ा मजा आता है आज तुमने तो अपनी दादी दिखा हमें भी अपनी की याद ताजा करा दी | दादी जी को हमारा भी प्रणाम कहना |
July 15, 2009 at 9:12 AM
अरे आदि ये खेल तो मै भी खेलती हूँ अरे पहले क्यों नही बताया तो आज कल खूब मज़े ले रहे हो दादी के साथ आशीर्वाद्
July 15, 2009 at 9:32 AM
दादियाँ होती ही इस लिए अपने पोतो पोतियों से खेलने के लिए . मेरी दादी कुमाऊ से थी एक गीत गाती थी जिसमे घघुती बसुती का जिक्र होता था
July 15, 2009 at 9:43 AM
mauj le rahe ho beta
July 15, 2009 at 11:05 AM
आदि बेटा दादी का दिल भी लग गया तेरे साथ, ओर अब दोनो खुब खेलो, दादी दादा ऎसे हि होते है बेटा.
बहुत सा प्यार तुम्हे ओर दादी को प्रणाम
July 17, 2009 at 5:52 PM
aap ke khel bhee nirale hai
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