कल शाम को अच्छी बरसात हुई मौसम भी काफी ठण्डा हो गया.. पापा मम्मी के आने का समय भी हो गया पर वो कुछ लेट थे.. पर जब आये तो उनके हाथों में रंग बिरंगे डिब्बे थे.. आहा मेरे लिये गरमा गरम जलेबियां आई थी.. आया न मुँह में पानी? मेरे मुँह में भी आया था.. फिर क्या डिब्बा खोलो जलेबी खाओ..
मेरी जलेबी पर नजर तो नहीं है आपकी?
जलेबी खाने के बाद.. रस भी तो कम स्वादिष्ट नहीं होता... अंगुली से लो और..
चाट लो अंगुली.. ये किसी ने सिखाया नहीं है.. अनुभव से सिखा है हमने..
वैसे शिव अंकल कल चिट्ठा चर्चा में मिठाई की बात कर रहे थे..कह रहे थे "आदित्य की नैनो देखिये और उससे मिठाई की मांग कीजिये. नई कार आई और आदित्य ने मिठाई नहीं खिलाई. ऐसे चलता है क्या?"
शिव अंकल आप चिन्ता न करें..मैंने मिठाई खा ली है.. :))
है पसंद?





July 23, 2009 at 5:58 PM
अरे आदित्य बेटा तुमने तो अकेले अकेले जलेबी खा लिया ! मुझे तो जलेबी बहुत पसंद है! जलेबी देखकर मुँह में पानी आ गया! ज़रा रुको मैं आती हूँ फिर हम दोनों साथ जलेबी खायेंगे!
July 23, 2009 at 6:21 PM
आदि, हमारे मूँह में तो पानी आ गया..अब हमारा क्या करें...जल्दी आता हूँ तुम्हारे पास..पापा को कह देना कि सब मिठाई लाकर रखें जितनी दिखा कर हमें ललचा रहे हैं.
July 23, 2009 at 7:07 PM
हमें भी जबेली खानी है..
July 23, 2009 at 8:11 PM
तुम एक इतनी छोटी सी जान अौर इतनी सारी जलेबी (?)...कुछ बचा कर भी रख लेना आदि...
July 23, 2009 at 8:36 PM
अरे वाह यार मुंह में वाकई पानी ले आये.. अब तो जलेबी की तलब लग गयी है..शाम तक खानी पड़ेगी..
July 23, 2009 at 8:47 PM
ओये हीरो इतना दिल क्यों जला रहे हो हाँ.........एक आध इधर भी दो ना...........
love ya
July 23, 2009 at 9:00 PM
Arre dost, hame bhi to khilao.
July 23, 2009 at 9:02 PM
आदि बेटे , इतनी जलेबी तुम नहीं खा पाओगे .. मेरी और तेरी पसंद बहुत मिलती है .. मुझे अपने साथ रहने दो .. तेरे बहाने मैं भी खाती रहूंगी पसंदीदा चीजें !!
July 23, 2009 at 9:49 PM
aare aadi baba jileba kha rahe hai,vaise nano aadi ki ,tho saari jilebi bhi aadi ki ,hai na.
July 23, 2009 at 10:17 PM
अकेले अकेले :) जलेबी तो मुझे भी बहुत पसंद है ..बचा लेना थोडी सी
July 23, 2009 at 10:56 PM
खूब जलेबी खाय, कछु मुँह पै लिपटावत.
आदि तुमको प्यार, हमें यूँ क्यों ललचावत ?
July 23, 2009 at 11:03 PM
aadiya ko jlebi khate dekh sab ka man jalebi khane ka ho aayaa....looking cute...
July 23, 2009 at 11:05 PM
आदि।
अकेले-अकेले ही खा रहे हो।
कुछ हमारे लिए भी छोड़ दो भाई।
July 23, 2009 at 11:09 PM
बरसात का मौसम और गर्म जलेबी क्या कहने आदि भाई ।
July 23, 2009 at 11:39 PM
खाओ-खाओ ख़ूब खाओ, हम तो तुम्हें खाता देखकर ही मज़ा ले रहे हैं!
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चाँद, बादल और शाम
July 24, 2009 at 12:01 AM
ओ भैया एक जलेबी इधर भी ।
मुझे मीठा बहुत पसंद है ।
July 24, 2009 at 12:20 AM
वाह बेटे...खुद ने तो खाली..और हमारा नुक्सान..अब जाकर जलेबी खरीद कर लानी पडेगी..तब चैन पडेगा.:)
रामराम.
July 24, 2009 at 12:27 AM
बहुत ही बढिया ....पर जलेबी खाना मुझे भी बहुत पसन्द है ......लगे रहो...........
July 24, 2009 at 1:29 AM
ये चीज़ अपनी भी कमजोरी है...डिब्बा दिखा दिखा कर काहे ललचा रहे हो. सच में अब तो शाम तक इंतजाम करना पड़ेगा.
July 24, 2009 at 2:03 AM
yaar sabke mumh main pani aa raha hai...
par mere mumh min garma garam jalebi ka taste aa raha hai...
aur ab toh khusbu bhi..
aur ab man lalcha raha hai..
....
yaar yeh kya tha..
aise akele akele nahi khate...
mil baant kar khana chahiye..
...
July 24, 2009 at 3:15 AM
अरे आदि, तुम तो छाली जबेली खा गये.
ये अच्चा नी है.......
July 24, 2009 at 4:56 AM
अरे अब हमें भी खानी है! हमारे घर तो पड़ोस के धन्नो हलवाई के यहां से आती है!
July 24, 2009 at 6:46 AM
अरे आदि ! कल की बरसात का तो हमने भी खूब मजा लिया लगभग एक घंटे तक बरसात में नहाते हुई बाइक चलाई और लेकिन घर पहुँचने के बाद ये जलेबियाँ तो नहीं मिली लेकिन पकौडियां खाने का मजा खूब आया |
July 24, 2009 at 7:20 AM
are aadi,
akele akele jalebi chal rahi hai? neeraj ko nahin poochhoge? chalo, koi baat nahin,
July 24, 2009 at 8:07 AM
सही है बेटा मौज ले रहे हो...हमारे मुंह में भी पानी आ रहा है
July 24, 2009 at 11:10 AM
muh me pani aa gaya beta...
July 24, 2009 at 2:19 PM
kewal khai hi...
ganda baccha
:)
humein bhi kuch de deta....
(hum bhi agar bacche hote...)
July 25, 2009 at 12:54 AM
आदि बेटा
ये सब जो आपसे जलेबी मांग रहे हैं उन सबसे पहला आपके साथ जलेबी खाने का अधिकार हमारा बनता है। है कि नहीं?
:)
खूब जलेबी खाऒ और ऊपर से गरमा गरम दूध भी पीओ.. मजा आयेगा।
July 28, 2009 at 10:11 PM
वाह! जलेबी? अकेले-अकेले खा लिया छोटू?
ये अच्छी बात है. वैसे मैं भी हाल में ही घुन्नन के साथ चोटिया जलेबी खा चुका हूं. दिल्ली आता हूँ तो तुम्हारे साथ फिर से खाऊंगा.
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