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स्नान, मौज, काम, शरारत, हठ और शेव...

जब बाथरुम में जाता हूँ तो कितनी मौज होती है.. खेलने को और काम करने के लिये कितना कुछ होता है.. मेरी ये सभी शरारतें कैद है इस विडियो में.. फुरसत से देखिये.. और हर पल को महसुस किजिए.. शुरु से अंत तक कई शरारतें कैद है इसमें..



कैसा लगा?


15 comments:

Comments

सही जा रहे हो बेटा !


बहुत सही सही कर रहे हो.:)

रामराम.


बढिया मजे ले रहे हो !


धन्य हुए इस महा स्नान को देख...कुछ किचन से भी सामान लाकर बाल्टि में डालो :)


वाह मज़ा आ गया... कुछ समीर अंकल की बात पर भी ध्यान दो .


अरे वाह आदि बेटा!
तुम तो बहुत बड़े हो गये हो,
बाथरूम मे कच्छा पहन कर नहाने लगे हो।


आदि भाई मौजा ही मौजा ।


क्या बात हॆ बडे बच्चे, अब कुछ ही समय में एसे खेल के साथ गाने भी लगना.... खुब मजा आया


are aadi saahab,
main bhi to soch raha tha ki delhi me achanak baarish kaise ho gay?
aaj too nahaya tha shayad isliye.


बिलकुल ठीक कह रहे हो आदि। इसका मजा तो वही जानता है जो ऐसा करता है। वाह!वाह!


अच्‍छा अब मुझे पता चला कि मम्‍मी बाथरूम का दरवाजा बंद क्‍यों रखती हैं । एक बार मौका मिलने दो फिर मैं भी बाथरूम की सब चीजें उठा पटक के बराबर कर दूंगा । ये तरीका दिखाने का शुक्रिया आदि भैया ।


mast ho kar naha rahe ho.. sahi hai guru... abhi jitna nahana hai naha lo.. fir thadh me kaise nahaoge?? :D


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