मैं लपक लेता हूँ दूसरों कि बॉल की तरफ और उनसे बॉल देने की जिद्द भी करता हूँ.. और चुंकि मैं सबसे छोटा प्लेयर हूँ इसलिये कोई मना भी नहीं करता.. ;)
बॉल से खेलने के बाद मेरा अगला टारगेट होता है क्रिकेट का बैट और बॉल.. पहूँच गया पिच पर और विकेट पर खडे़ भय्या से ये बैट ले लिया..
और पोसिजन लेकर तैयार.. वैसे काफी भारी बैट था ये..
और जब पिच पर दौड़ लगाने लगा तो सभी बच्चे पापा से कहने लगे..."अंकल!! प्लीज इसे हटा लो... इसे चोट लग जायेगी.."
चोट की ज्यादा चिन्ता नहीं है अभी.. बस रेत में खेलने के मजे ले रहा हूँ..
कैसा लगा?
मुमेंट ऑफ द डे मेरी बोली में एक शब्द नया जुड़ गया रविवार को.. और इस शब्द का पापा बहुत दिनों से इंतजार कर रहे थे... और वो है "पा पा" ... जी हाँ. मम्मी, मम्मई, चाचा, नाना, ओ हो.. के बाद ये एक और शब्द.. |
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July 13, 2009 at 8:34 PM
ha ha ha ha ha oye hero koi tension nahi laine kaa ok, khub khelne kaa yeeeeeeeee"
love ya
July 13, 2009 at 8:40 PM
गोदी में रहने के बदले मिटटी में खूब खेलना. तभी माटी पूत कहलाओगे. इसमें बहुत फायदा है. बच्चे बीमार नहीं पड़ते. इम्मुनिटी अपने आप डेवेलोप हो जाती है. फोटो तो बड़े मजेदार है. प्यार
July 13, 2009 at 8:52 PM
दिलेरी से खेलो..किसी से डरना मत..हमारी फोटो दिखा देना कि ताऊ को बुला लाऊँगा..लेकिन उनको भी खेलने देना..किसी का खेल क्यूँ बिगाड़ना. अप अपना खेल खेलो!!
पापा तो पा पा सुन कर फूले नहिं समा रहे होंगे..उनको बोलो..हमें मिठाई भेंजे!!
July 13, 2009 at 9:08 PM
देखो आदित्य , कच्ची जमीन पर ही खेलो तो ज्यादा अच्छा होगा .
पक्के फ़र्श पर खेलने से दाँतो में चोट लगने का खतरा रहता है !
July 13, 2009 at 9:14 PM
aadi sahi bole chot se kya darna,abhi tho khelne ke din hai ,khub khelo :):)
July 13, 2009 at 9:55 PM
बडे बच्चों के खेल के बीच में मत जाया करो .. सचमुच चोट लग जाएगी।
July 13, 2009 at 10:35 PM
बढ़िया है, समाज में जीने तैयारी अच्छी चल रही है.
July 13, 2009 at 10:55 PM
अरे वाह आदि.. एक दिन में इतनी तरक्की..
खिलौने वाले बैट से असली बैट पर आ गए..
July 13, 2009 at 11:46 PM
aaditya ko chhota sa bat le dejiye...lag jayega use...
July 13, 2009 at 11:55 PM
are vaah beta , naya shabd bolne par papa to khush ho rahe honge :)papa mummy dono ko badhai ......haan bade bachon ke beech jara dhayan se :)
July 14, 2009 at 12:02 AM
भाई अब सचिन तेंदुलकर बनना है. बिल्कुल.
रामराम.
July 14, 2009 at 12:05 AM
ताऊ, रामप्यारी की क्लास में गेम्स भी सिखाओगे तो जरुर सचिन बनुंगा.. खों खों..
July 14, 2009 at 12:18 AM
रामप्यारी के स्कूल मे स्पोर्ट्स के अलावा होर्स राईडिंग और पैरा ग्लाईडिंग जैसे खेल भी सिखाये जाते हैं. बस तुम्हारा एडमिशन होगया..अब चिंता मत करो..सब जिम्मेदारी स्कूल की है. बस अनुपस्थित मत रहना क्लास से.:)
July 14, 2009 at 12:33 AM
बैट छोटा है तुम्हारा ...पापा से कहो बड़ा दिलवाये...अब तो कह सकते हो.
July 14, 2009 at 12:54 AM
अब तो पापा पापा कहकर सारे काम करा लोगे मियाँ
July 14, 2009 at 3:05 AM
vaah beta badon ko nachana khoob aataa hai tumhen lage raho aasheervaad
July 14, 2009 at 3:07 AM
वाह, रन कितने बनाये प्यारे!
July 14, 2009 at 3:58 AM
aadi bhayi kab se bado wali harkate suru kar di
July 14, 2009 at 6:13 AM
खूब खेलो
July 14, 2009 at 6:37 AM
खूब खेलो ! बिना चोट के डर से , छोटी मोटी छोट तो लगती रहती है उसकी क्या परवाह करनी और रेत में तो खूब लोट पोट करा करो |
July 14, 2009 at 7:30 AM
बेटा अब हमें इंतजार है कि तुम अंकल कह कर कब बुलाओगे।
July 14, 2009 at 8:18 AM
आदि बेटा!
जब हम तुम्हारे घर आयेगे तो
तुम्हारे खेलने के लिए छोटा बैट
अवश्य लेकर आयेगे।
July 14, 2009 at 8:29 AM
चलिए आज रंजन जी को पापा कह कर कृतार्थ कर ही दिया आदि ने .
July 14, 2009 at 8:47 AM
अरे बच्चे रेत ओर मिट्टी मे जितना भी खेलो उतने ही मजबुत बनोगे, मुझे लगता है कि बेट थोडा बडा नही है, ओर बेटा तुम से भारी भी, लेकिन क्या करे पापा तुम्हे वोही चाहिये ना...
बहुत प्यार बेटा
July 14, 2009 at 7:06 PM
Enjoy!
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