भुट्टे का मौसम जल्द ही जाने वाला है.. मैने तो इसका स्वाद ले लिया आपने लिया क्या? भुट्टा दिलाया मम्मी ने और मैने भी बडे़ चाव से खाया..
जरा दम लगाना पड़ता है.. मजबुत दांत चहिये.. थोड़ी ताकत भी.. दम लगाना पड़ता है..
ये मुँह भुट्टा खाकर ही सफेद किया है.. क्या मेकअप है आदि..
और आपन अभी तक भुट्टा नहीं खाया तो आ जाइये आज शाम मेरे संग भुट्टा खाने!!





July 20, 2009 at 6:04 PM
तो आज भुट्टे का स्वाद भी चख लिया !
July 20, 2009 at 6:09 PM
ओए होए..कच्चा भुट्टा खा रहे हो क्या? पेट दुखेगा..मम्मी ने तो पक्का उबाल दिया होगा आदि के लिए..है न!!
लालच लग गई..अभी जाता हूँ बाजार लेने!!
July 20, 2009 at 7:03 PM
oye aadi akele akele bhutta kha rahe hai aap,ek hame bhi chahiye:)
July 20, 2009 at 7:21 PM
कनफ़्यूजन क्रियेट मत करो बच्चे अभी तो हमारी मक्का से पहला भुट्टा आया ही नहीं,
दिल्ली में न मिले तो पानीपत आ जाना !
July 20, 2009 at 7:26 PM
वाह क्या बात है.....
लगे रहो आदि!
मुझे भी भुट्टे बहुत पसन्द हैं।
July 20, 2009 at 7:57 PM
हमने तो अभी तक खाया ही नहीं... लगता है पानीपत से मंगवाना पड़ेगा...
July 20, 2009 at 8:04 PM
खा रहे हो कि पूरे मूँह में पोत लिए हो..चलो, अब नहाओ...ऐसे खाते हैं क्या?? पापा को कहो कि दाने निकाल कर कटोरी मे दें..तो खेल भी सकोगे और खा भी सकोगे.. :)
अच्छा है गन्ना नहीं मिला..वरना तो अभी मख्खी भिनभिना रही होती तुम्हारी हरकतों से...हा हा!!
July 20, 2009 at 8:11 PM
ओये हीरो अकेले अकेले हाँ.......मुझे भी तो खाना है न...
regards
July 20, 2009 at 8:27 PM
aaj sae tumhara naan "khaau prasaad blog jagat waale "
Rachna
July 20, 2009 at 8:44 PM
लगता है आना ही पड़ेगा
July 20, 2009 at 8:55 PM
बहुत पसंद हैं मुझे .. ललचा दिया न !!
July 20, 2009 at 9:11 PM
विवेक अंकल,
अपने खेत से भुट्टे आ इंतजार नहीं करो.. खरीद कर खा लो अभी.. जब उगे तो और खा लेना..
आदि
July 20, 2009 at 9:14 PM
कुश अंकल..
पानिपत से... अरे अभी तो वहां भुट्टे लगे नहीं है.. आप भी बाजार से खरीद लो आज ही..
July 20, 2009 at 9:14 PM
समीर अंकल,
आपने ठीक पहचाना भुट्टा तो कच्चा ही था.. क्या करता इंतजार नहीं कर पा रहा था.. और मम्मी से जिद कर कच्चा ही ले लिया... वैसे आज पापा सिका हुआ भुट्टा लाने वाले है...
July 20, 2009 at 11:47 PM
अरे अरे । कच्चा भुट्टा । मैंने तो उस दिन बढिया नरम नरम भुट्टे खरीदे थे अपने मम्मी पापा के लिए । साथ में नींबू भी । मैं तो छोटा हूं ना अभी नहीं खा सकता । :D
July 21, 2009 at 1:21 AM
खाए जाओ-खाए जाओ ,अभी तो जौनपुर के प्रसिद्द भुट्टे आये ही नहीं,कैसे कह दें कि मौसम चला गया.
July 21, 2009 at 1:22 AM
कच्चा भुट्टा भी इतने मजे से खा रहे हो आदि ..पका हुआ खाओ जी जल्दी किस बात की है ..:)
July 21, 2009 at 1:33 AM
barasat ka mausam aur भुट्टे का स्वाद muh me pani aa gaya bhai aadi
July 21, 2009 at 2:59 AM
वह बिटवा दबा के खाओ..उबालो भूनो..और देर हो रही है तो ऐसे ही..लगे रहो..
July 21, 2009 at 3:17 AM
थोड़ा भुट्टा भून के खाओ..
थोड़ा भुट्टा कच्चा ही खाओ..
थोड़ा भुट्टा चबा के खाओ..
थोड़ा भुट्टा उबाल के खाओ..
थोड़ा भुट्टा का आटा बना लो..
फिर उसकी रोटी बना कर खाओ..
लेकिन खाओ, बेटा खाओ.. :D
July 21, 2009 at 4:53 AM
यार आदि तू ये रोज हमको खाने की चीजे दिखा दिखा कर ललचाता है और तेरे को मालूम है कि हम पर और समीर अंकल पर खाने पीने के मामले मे हाईकमान की पाबंदी है..सो भाई जरा छुप छुप के ही खा लिया कर.:)
रामराम.
July 21, 2009 at 8:29 AM
मौसम जायेंगा तो फिर आयेगा, तुम बस मज़े लो!
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July 21, 2009 at 9:34 AM
वाह आदि भाई भुट्टे खा रहे हो ...वो भी अकेले अकेले ...
हमें भी दो न ....प्यार ...
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