अभी तक तो में दांतों का स्वागत DENTON टेबलेट से कर रहा था .. पर जीतु अंकल ने बताया कि अब उससे काम नहीं चलने वाला.. और अब उन्होने मुझे खाने को दी है CALCAREA PHOSPHORICA टेबलेट.. इसमें भी मजा है.. पता है क्यों? क्योंकि अब मुझे मिलती है आठ गोली.. चार सुबह और चार शाम को..और इन्हे खाने में कितना मजा आता है ये तो आप इस विडियो में देख ही चुकें है...अब इतने दांत आ गये तो इनकी सफाई की व्यवस्था भी करनी पडे़गी न.. पता है मम्मी जब भी वाश बेसिन पर ले जाती है तो मैं वहां से पापा मम्मी के ब्रश उठा लाता था.. पर वो खेलने के लिये ठीक थे.. दांत साफ करने के लिये तो खुद का चहिये न?
तो ये आ गया मेरा टुथ ब्रश..छोटा सा मेरी साईज के हिसाब से..
आपको लग सकता है कि मैं ब्रश कर रहा हूँ.. पर दरअसल मैं...अब आप समझ जाओ न कि क्या कर रहा हूँ मैं इससे...
और इस मुँह में डाल घूम लेता हूँ...वैसे इस फोटो में जो कुलर देख रहे हैं न? वहीं है आज मेरी "शरारत ऑफ द डे"...
शरारत ऑफ द डे मेरे मुँह में ब्रश भी देखा और फोटो के पीछे कुलर भी.. पता लगा मेरी शरारत का? ब्रश का अगला हिस्सा मुँह में दबाये पिछला हिस्सा कूलर की जाली में डाल दिया.. और धीरे धीरे पुरा ब्रश कुलर में... अभी भी वहीं है... आदि अब ब्रश किससे करोगे? |
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June 13, 2009 at 8:23 PM
बहुत ही बढिया....
June 13, 2009 at 9:24 PM
वाह छा गये गुरु...बिल्कुल गुरु घंटाल होते जारहे हो.:) एक काम करो एक दर्जन ब्रस बुलवाकर रखो.:)
रामराम.
June 13, 2009 at 9:43 PM
जब रहे ब्रजचन्द छ मास के,
दसन थे दो मुख मे खिले।
किन्तु तुम्हारे तो आठ हो गये हैं।
बिल्कुल कन्हैया लग रहे हो।
शुभाशीष।
June 13, 2009 at 9:52 PM
ab is brush se khelego bhi :)
June 13, 2009 at 10:42 PM
क्या बात है गुरु....आप को तो हर रोज एक नयी ब्रश चाहिए।
June 14, 2009 at 12:01 AM
बहुत बढ़िया अभी से दांतों की सुरक्षा में जुट गए |
June 14, 2009 at 12:33 AM
हाँ ऐसे ही शरारत करते रहो तभी तो अच्छे बच्चे बनोगे !
June 14, 2009 at 3:00 AM
बच्चू अब पीछे की दो दाड आयेगी, लेकिन डरने की कोई बात नही बहादुर बेटे हो, चलो अब जल्दी से कोई नयी शरारत शुरु करो.
प्यार बहुत सा प्यार
June 14, 2009 at 3:06 AM
अब बताओ? कैसे करोगे अब ब्रश...?? नीम की दातून लाकर दें क्या? :)
June 14, 2009 at 3:46 AM
अरे वाह !! नया दांत मुबारक आदि .
June 14, 2009 at 6:17 AM
वाह, यह तो बैंजामिन स्पोक की पुस्तक सा रेफरेंस बुक बनता जा रहा है बालक पालन के लिये!
June 14, 2009 at 7:04 AM
ज्ञान जी, आदि के ब्लोग लिखने के उद्देश्यों में एक पेरेंटिंग के अनुभवों को साझा करना भी है.. आपके ये पहचाना हमारे लिये खुशी की बात है..
शुक्रिया..
June 14, 2009 at 8:12 AM
बच्चा अभी छोटा है, सीख जागेगा ब्रश करना
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