मैं नकल करने में उस्ताद हूँ.. कान की बड़ इस्तेमाल करते देखा तो बड़ कान में.. टुथ ब्रश इस्तेमाल करते देखा तो वो भी.. अब बारी आई झाडु की.. वैसे तो ये टेरेस पर रखा होता है और मेरी पकड़ में नहीं आता पर कुछ दिनों से चिडिया झाडु के तिनके निकालने लगी तो ये घर के अन्दर आ गया.. छोटी चिडिया से तो बच गया पर... अब मैं क्या बताऊ आप देखिये ये मजेदार चित्र कथा..
June 22, 2009 at 2:59 AM
छा गये उस्ताद छा गये. :) आज "शरारत आफ़ द डॆ" पर क्युं मेहरवानी करदी?
रामराम
June 22, 2009 at 3:11 AM
गुड गोइंग।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
June 22, 2009 at 5:03 AM
हा हा!! झाडू साफ कर रहे हो कि घर? पूरा घर भी साफ करके रखना-जब तक मम्मी पापा दफ्तर से आयें. :)
June 22, 2009 at 5:21 AM
भई आज पुरे घर की करनी है क्या
June 22, 2009 at 5:29 AM
आदित्य रंजन।
घर की सफाई तो ठीक है,
कल को हाथ की सफाई मत दिखलाना।
June 22, 2009 at 5:31 AM
शावस बेटे, चलो सफ़ाई दिवस मनाये
प्यार
मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे
June 22, 2009 at 7:17 AM
प्यारे हमें भी ऐसी वाली झोपड़ी चाहिये - थोड़ी बड़ी सी!
June 22, 2009 at 7:48 AM
सफाई का बीडियो बहुत लगा . बालक काफी समझदार होनहार लगता है .... बहुत बढ़िया .
June 23, 2009 at 1:04 AM
हा हा हाहा हा हा हा हा हा ओये हीरो आखिर मिल ही गया न मेहनत बेकार नहीं गयी... क्या सफाई की है हाँ..."
love ya
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