मेरे लिये वो किसी खिलौने से कम नहीं... जैसे दुसरे खिलौनों से खेलता हूँ वैसे ही बिट्टु के साथ भी..
पता नहीं अंकल आंटी क्यों बिट्टु को मुझसे बचाते रहते हैं.. मैं तो उसे पकडने की कोशिश ही करता हूँ.. कभी हाथ, कभी पैर.. और कभी मुँह..
हम दोनों खुब मस्ती करते है.. बिट्टु के खिलौनो से मैं भी खेलता हूँ... वैसे आप "भी" की जगह "ही" पढे़ तो भी ठीक है...
आंटी जिस कमरे में बिट्टु को ले जाती है मैं भी उसके पिछे हो लेता हूँ.. ना उसको सोने देता हूँ न खुद ही सोता हूँ..
बिट्टु के आने से एक प्यारा दोस्त मिल गया है.. मेरी साईज का.. है न?कैसी लगी मेरी नई दोस्त?
शरारत ऑफ द डे अंकल के पिछे पिछे किचन में चला गया.. और अपनी नकली हंसी से उन्हे सम्मोहित करने लगा.. अंकल भी मुझे हँसता देख खुश हो गये और मुझसे बात करने लगे.. फिर अचानक उनका ध्यान मेरे से हटा और मैने पलक झपकते ही टोमेटो केचअप की बोतल उठा ली..... बोलत एक लिटर वाली थी और पूरी भरी हुई थी.. इतनी भारी बोतल मुझसे कैसे उठती... और.. और.. और.. धड़ाम...... ये क्या बोतल गिर कर टुकडे़ टुकडे हो गई.. अंकल ने पलट कर देखा तो मैं हंस रहा था.. आदि इतनी शरारत चोट लग जाती तो? |
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June 24, 2009 at 2:01 AM
aaditya ki baaten samajhne ki puri kshamta rakhne wala aapka dimaag zyada achchha laga
aadi hzaaron saal jiye
June 24, 2009 at 2:19 AM
बहुत अच्छा आपको दोस्त मिल गई लेकिन उसके बाल मत खींचना और उसे काटना भी मत वरना अंकल आंटी बिट्टू को तुमसे दूर रखेंगे |
June 24, 2009 at 2:29 AM
आदि आपकी दोस्त भी आपकी तरह ही प्यारी है
June 24, 2009 at 2:46 AM
बेटा देख बिट्टू तेरे से छोटी है पर जब तुझसे तेरी उम्र से बडे दोस्त मिलेंगे तब वो तुझसे कैसे खेलेंगे? इसलिये बिट्टु को बिल्कुल प्यार से रखा कर.
और टमाटो केच अप की बोतळ फ़ोड दी वो अच्छा किया आखिर हमारा राष्ट्रिय उत्पादन बढाने मे तूने मदद की. कांच के टूकडों से खुद को बचाते हुये यह राष्ट्र सेवा किया कर.:)
रामराम.
June 24, 2009 at 2:59 AM
अरे वाह, दोस्ती मुबारक हो।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
June 24, 2009 at 3:20 AM
बहुत अच्छे, socialization यहीं से शुरू होता है.
June 24, 2009 at 3:22 AM
ये देखे प्यारी बिट्टु.. बिट्टु अभी ६ माह की है और भाग नहीं सकती... केवल पेट के बल सोती है..
अबे पलटू क्या इरादे है ? अभी से भगाने के चक्कर मै:)
बेटा बच्चे हमारे गुरु होते है, यह तुम ने बोतल तोड कर सिद्ध कर दिया, लेकिन मजा आया कि हमारा पलटू बु्द्धु नही मास्टर है मास्टर.
बहुत बहुत प्यार बेटा, लेकिन कांच से बच कर रहना
June 24, 2009 at 3:51 AM
बहुत शरारती हो प्यारे! :)
June 24, 2009 at 4:17 AM
ओये हीरो अभी ये दोस्त छोटी है तो जरा ध्यान रखना उसको भी चोट न लगे हाँ......ज्यादा शरारत नहीं ओके...
love ya
June 24, 2009 at 5:11 AM
ये बढ़िया रहा-एक दोस्त मिल गई. खूब खेलो बिट्टू के साथ मगर काँच की बोतल-अगर चोट लग जाती तो भूल जाते सारे नकली हँसी-जरा संभल कर. इत्ती बदमाशी नहीं करते.
June 24, 2009 at 5:47 AM
कांच के टुकड़ों में
छवियां नहीं तलाशी
फिर तो जाओ काशी।
June 24, 2009 at 6:48 AM
आदित्य और बिट्टु की जोड़ी बहुत अच्छी है।
June 24, 2009 at 7:40 AM
आदि, आपकी दोस्त बहुत प्यारी है.
June 24, 2009 at 9:11 AM
badhiya hai.. apne barabar ka dost mil hi gaya Adi ko.. :)
June 24, 2009 at 10:16 AM
बिट्टू प्यारे, जमाए रहो...! धीरे-धीरे बिट्टू भी तुम्हारी जैसी सयानी हो जाएगी।
June 24, 2009 at 10:18 AM
भूल सुधार: सम्बोधन ‘आदित्य’ को था बिट्टू को नहीं।
June 24, 2009 at 7:27 PM
भई तुम्हारी फ़ोटू खिंचवाने की इश्टाइल हमें बहुत पसंद आई !
June 25, 2009 at 12:26 AM
dost milne ki badhi ho aadi
June 25, 2009 at 1:32 AM
बहुत प्यारी दोस्त है आपकी .बिलकुल आपके जैसी खूब खेलो और शरारत ऐसी मत करो कि कि लग जाए आपको :)
June 25, 2009 at 5:11 PM
आदि तुम्हारी दोस्त तो बहुत ही प्यारी है!
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