ये देखो न पापा मम्मी मेरे खिलौने कहाँ रख देते है? मेरा हाथ भी नहीं पहुँच सकता है इतना ऊपर तक... कितनी कोशिश करनी पड़ती है और ताकत लगानी पड़ती है.. अब पापा मम्मी तो संमझते नहीं न?
और एसे बात नहीं बने तो पंजे पर खडे़ होकर भी कोशीश करनी पड़ती है, और साथ में एक चीख... (आंईईईई............) अगर कोई सुन ले...
ना सुने तो खुद ही चढ़ लो...आखिर है ही कितना ऊपर..:)
वैसे आपका ये भ्रम दूर कर दूँ कि मेरी रुची खिलौनों में है.... वो तो एक बहाना है... वहां रखे ताले, चाबी, पेन, पेचकस.. वगैरह मुझे ज्यादा आकर्षित करतें हैं....



June 17, 2009 at 2:04 AM
काश मै जानता होता कि आपका घर किधर है तो आकर आपका मदद करता....बहुत सुन्दर्
June 17, 2009 at 2:45 AM
मम्मी पापा तुमको सिखा रहे हैं की जीवन में अपनी पसंद की चीजें आसानी से नहीं मिलती...समझा करो आदि जनाब.
नीरज
June 17, 2009 at 2:57 AM
खिलौने तक पहुचने के लम्बाई बढानी पडेगी, जिसमे अभी समय है, तो पापा से मागना पडेगा ।
June 17, 2009 at 3:42 AM
हां वो तो तेरी कारगुजारियां हमको पता ही चल गई हैं कि तू अब बडा हो चला है और खिलोनों की बजाये अब पेचकश पाने तुझको ज्यादा आकर्षित करते हैं.
पहले मैं भी ऐसा ही करती थी. पर मेरा नाम मत लेना, ला तेरा कान इधर ला..चुपचाप सुन..एक प्लास्टिक की बाल्टी ला कर यहां औंधी रख कर उस पर चढ जा..और उसपर से टेबल पर...मैं तो सिआ ही करती हूं.:)
देख आदि मेरा नाम लिया तो अगली बार कोई टिप नही दूंगी.:)
June 17, 2009 at 3:42 AM
हां वो तो तेरी कारगुजारियां हमको पता ही चल गई हैं कि तू अब बडा हो चला है और खिलोनों की बजाये अब पेचकश पाने तुझको ज्यादा आकर्षित करते हैं.
पहले मैं भी ऐसा ही करती थी. पर मेरा नाम मत लेना, ला तेरा कान इधर ला..चुपचाप सुन..एक प्लास्टिक की बाल्टी ला कर यहां औंधी रख कर उस पर चढ जा..और उसपर से टेबल पर...मैं तो सिआ ही करती हूं.:)
देख आदि मेरा नाम लिया तो अगली बार कोई टिप नही दूंगी.:)
June 17, 2009 at 3:58 AM
बस कुछ दिन और फिर आप यहाँ तक पहुँच जायेंगे ...कोशिश जारी रखे पर ध्यान से :)
June 17, 2009 at 4:40 AM
अरे पलटू तु इस राम्प्यारी कॊ घर ले आ यह तेरी मदद करेगी, ओर हां पिछले दिनो तुम ने एक छोटा सा स्टूल दिखाया था, वो कहां है यार...
प्यार प्यार
June 17, 2009 at 4:50 AM
वाह बेता कई दिन बाद देखा है अरे तुम तो बडे हो गये हो वह अब घर के सामान की खैर नहीं अधिक तोड फोड नहीं करना वैसे हर चीज़ की पहचान कर लोीआशीर्वाद जल्दी से बडे हो कर नानी के पास आ जाना
June 17, 2009 at 5:09 AM
मम्मी पापा से कहो कि बस खेलूँगा-बदमाशी नहीं करुँगा-मिल जायेंगे खिलौने...वरना तो बस ईईईईईईईईईई करते रहो. :)
June 17, 2009 at 5:19 AM
सही बात है भई, इत्ती परेशानी जो होती है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
June 17, 2009 at 5:46 AM
Bahut hi badhiyan lekh hai. Ise dekhakar apney bachpan ki shaitaniyan yaad a gai. Vaisey kisi cheez ko pane k liye tab tak prayas karna chahiye jab tak vo mil na jae. So, carry on aditya! untill u get it :)
June 17, 2009 at 6:12 AM
खिलौनों से ज्यादा टेक्नीकल चीजें पसंद आ रही हैं :) होनहार बिरवान के लक्षण दिख रहे हैं.
June 17, 2009 at 6:42 AM
बहुत अच्छा ! प्रयास जारी रखो कामयाबी जरुर मिलेगी |
June 17, 2009 at 9:11 AM
shaetani jindaWAAD ,
June 17, 2009 at 10:09 AM
intzaar kuchh din aur sweetu
June 17, 2009 at 10:20 AM
झुंझलाहट और खीझ के बीच मुस्कान फंस कर रह गयी.. बाकी तो सब ठीक ही है।
June 17, 2009 at 10:26 AM
बेटे यह एक साजिश है. तुम्हारे पापा मम्मी चाहते हैं कि तुम जल्दी से बड़े हो जावो. मेरी मनो तो बेकार मेहनत मत करो. जोरदार चिल्लाओ. झक मार कर तुम्हें सभी खिलौने दे देंगे. बताना नहीं कि हमने बताया है.नहीं तो बोलेंगे कि हमारे बच्चे को बिगाड़ रहे हो.
June 17, 2009 at 8:34 PM
जल्दी से बड़े हो जाओ बेटा।
June 17, 2009 at 9:31 PM
इस लिये क्युकी हम तुम्हारे मम्मी पापा हैं . चुप
रहो अगर ब्लॉग जगत मे हमारी शिकयात करोगे
तो लोग हमको डाट पिलायेगे , क्या तुम ऐसा
सोचते हो ?? देखो किसी नए नहीं डाटा , समीर
ताउजी नए भी नहीं . इस लिये अब शोर मत
मचाओ हम तुम्हारे मम्मी पापा हैं और ब्लॉग
जगत हमारे साथ हैं .
नहीं आदि बेटा ऐसा नहीं हैं , मे तुम्हारे साथ हूँ
और रंजन तुंरत आदि को खिलोने उतार के दो
वर्ना गूगल से शिकायत करके तुमको बाल
क्षम आयोग के कानून के तहत सजा दिलवाई
जायेगी कितना लिखवाते हो ब्लॉग तुम आदि बेटा से
आदि तुंरत पोस्ट लिख कर बातो पापा और मम्मी
पर मेरी बातो का कुछ असर हुआ या नहीं
with lots of love
Rachna
June 17, 2009 at 9:39 PM
Very unfair of Papa and Mommy...
(on facebook)
June 18, 2009 at 4:48 AM
बहुत बुरी बात है, लगता है आज पापा और मम्मी को डाँटना पड़ेगा। हमारे छोटे से आदि को परेशान करते हैं!!
:)
June 18, 2009 at 10:04 AM
beta jara mummy papa ko kissi kar do saare khilone aapki god me aa jayenge ..........kar ke to dekho
pyaar ke saath
bhavna
Post a Comment