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आदित्य - ये शेर खुद पिंजरे में आता है...

कभी देखा है एसा शेर जो खुद पिंजरे में आता हो? ये शेर अपनी मर्जी से पिंजरे में आता है और अपनी मर्जी से बाहर भी निकलता है..
शशि आंटी* के घर पर एक बड़ा सा स्टूल है.. बिल्कुल मेरे साईज का.... और घूमते घूमते मुझे इसमें जाना बहुत पसंद है..  और कल तो बहाना भी मिल गया... मेरी बॉल उसमें चली गई थी न?
और इसमें बॉल से खेलने का मजा़ और है... कितना भी मारो वहीं की वहीं रहती है.... पिछे नहीं घूमता पड़ता...   


और ये डण्डा पकड़ खो खो कर सबको डराने के भी मजे है....

बहुत हुआ भाई अब तो बाहर आ जाओ....

लो आ गये!! अपनी मर्जी के मालिक..




(*शशि आंटी - पापा मम्मी जब ऑफिस जाते है तो मैं इनके पास ही रहता हूँ)
14 comments:

Comments

आदि शरारतों में तुम्हारा जवाब नहीं....
नीरज


बाप रे!! ये शेर तो बाहर निकल आया..काटेगा तो नहीं? हम तो डर गये भई.


आदि तुम्हारा तो जवाब नही।
तुम्हारे इतने अच्छे चित्र खींचने के लिए,
छायाकार को बधाई।


आदि तुम टिक कर नहीं बठ सकते क्या आगे भी एक दिन तुम स्टूल पर चढ रहे थे आज नीचे घुस गये चलो कर लो बेटा शरारतें ये चार दिन ही हैं फिर तो पापा एक भारी सा बैग कँधे पर लटका देंगे फिर बनोगे बच्चू हा हा हा आशीर्वाद हमेशा खुश रहो


आदि तुम टिक कर नहीं बठ सकते क्या आगे भी एक दिन तुम स्टूल पर चढ रहे थे आज नीचे घुस गये चलो कर लो बेटा शरारतें ये चार दिन ही हैं फिर तो पापा एक भारी सा बैग कँधे पर लटका देंगे फिर बनोगे बच्चू हा हा हा आशीर्वाद हमेशा खुश रहो


अब बतायो ऐसे शेर पे प्यार क्यों आता है ?


अरे भाई यह खुला शेर किस का है, अरे अरे पकडो भी इसे.... अरे यह तो हमारा प्यारा प्यारा पलटू राजा है...
बहुत प्यार बेटे

मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे


. हमें तो डर लगता है. शेर बाहर हुआ और पिंजरा गिरा


अरे शेर भाई मुझे मत काट खाना.. मैं तो तुम्हारा सेकेरेट्री हूं.:)शिकार का नाम पता तो मैं ही बताऊंगा ना..बस उसी को काट खाना.:)

रामराम.


आदि यही तो बाल सुलभ शरारते होती है खूब खेलो और शरारते करो ! इनसे तुम्हारे साथ साथ सभी को मजा आता है |


पिंजरा बडा प्यारा, उसमे बन्द शेर भी प्यारा


wah Sherkhan wah... :)


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