मुझे ऐसे व्यस्त कर पापा मम्मी खाना खिला देते हैं.. जो मुँह पर निशान देख रहें है, उसी के है..
शरारत ऑफ द डे शाम को घर में मन नहीं लगता.. बाहर घुमने जाना होता है... कल शाम भी एसा ही हुआ.. पापा भी तैयार हो गये.. और बाजार जाने के लिये पापा की गोद में सवार हो गया.. अचानक पापा की नजर कंप्युटर पर पड़ी... देखा तो ब्लोग पर मम्मी का कमेंट था.. पापा मुझे गोदी में लेकर कमेंट पढ़ने लगे.. अब ये मुझे मंजूर नहीं था.. और मौका देख पापा का कान चबा गया... अब पापा के पास कोई विकल्प नहीं था... "आदि एसा करते हैं क्या?" |
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June 4, 2009 at 2:45 AM
sahi hai boss....mauj lo
June 4, 2009 at 3:49 AM
taala khol to liya ab band bhi mai hi karunga.....
June 4, 2009 at 4:30 AM
अरे पलटू, यार कमाल कर दी, यार ! अरे कान क्यो खा गये पापा का, ओर यह ताल बंदी भी खूब कर रहे हो.
प्यार
June 4, 2009 at 5:21 AM
वाह मेरे नटवर लाल..."तेरा जवाब नहीं...."
नीरज
June 4, 2009 at 6:35 AM
बड़े शैतान हो गए हो तुम तो!
June 4, 2009 at 8:34 AM
इंजीनियर बनने के गुण नज़र आ रहे हैं!
June 4, 2009 at 9:31 AM
ओह तो भैय्या जी मास्टर चाबी भी साथ रखने लगे है बहुत खूब
June 4, 2009 at 1:14 PM
इंजीनियरिंग भी चालु हो ही गयी :)
June 4, 2009 at 6:40 PM
कान चबाने वाले मामले में तो बड़े शैतान हो गए हो !
यार पल्टू कभी इन एयर टेल का भी कान चबा ले ना ! आज टिप्पणी करने भी नेट की स्पीड ने दुखी कर दिया ! अब जाकर बड़ी मुश्किल से टिप्पणी चस्पा हो पा रही है |
June 4, 2009 at 10:23 PM
dhakan lagana acha skill set hai, very much required in this generation
(on facebook)
June 5, 2009 at 1:39 AM
yaar..
aadi nath...
pure ache se kaan khAna...
pure maje lekar...
daba daba kar..
mithe mithe honge..
kaku bhaiya ko all d best..
aur ek request ..
use plz aaram se khane dena..
June 5, 2009 at 12:37 PM
ऐसे ही पापा के कान काटते रहो.. बड़े हो कर बड़े बड़ों के कान काटना.. :)
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