जैसा हमेशा होता है फ्लाइट लेट हो गई.. तो मेरे पास काफी समय था घुमने के लिये.. अब घुमने के लिये साईकिल तो लाया नहीं था तो एयरपोर्ट पर ये गाड़ी मिल गई.. वैसे आप तो इस पर सामान रखते होगें पर मैनें तो इस पर बैठने की जगह का जुगाड़ कर लिया.. इस गाड़ी पर बैठ वेटींग एरिया में बहुत देर घूमा..
घूमते घूमते जब थक गया और बोर हो गया तो इस आरामदायक कुर्सी पर बैठ गये.. घर से खिलौने तो लाये नहीं थे तो पापा के मोबाईल से काम चलाया. म्युजिक बजाया.. और डांस भी किया..
इतना सब करते करते मम्मी भी आ गई.. और में तपाक से मम्मी की गोद में चढ़ गया... और मम्मा को छू कर देखने/महसुस करने लगा..
मम्मी अकेली नहीं आई.. अपने साथ हापुस (अल्फाजों) आम का डिब्बा भी लाई.. अब तो रोज इन मीठे आमों का मजा लेता हूँ..
शरारत ऑफ द डे.. कोई मुझे बहला के एक जगह नहीं बिठा सकता.. कल शाम को ये कोशिश पापा ने की.. मेरा मन बाथरुम में जाकर पानी से खेलने का था और पापा मु्झे बार बार वहाँ से लाकर कूछ और खेलने को दे रहे थे... पापा पकड़ कर बाथरुम से लाते, कुछ खेल खिलाते और जैसे ही उनकी नजर हटती मैं दौडते हुए फिर बाथरुम की और.. चार-पाँच बार एसा करने के बाद उनको पक्का यकिन हो गया मैं एसे नहीं मानने वाला.. तो फिर मुझे बाल्टी और पानी के साथ छोड़ दिया... और मुझे मिला मेरा मन पसन्द खेल - आदि हर समय थोडे़ न नहाते है बेटा!!! |
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June 9, 2009 at 11:02 PM
लगता है किसी से मुलाकात तय थी।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
June 9, 2009 at 11:32 PM
गर्मी में तो जितनी बार नहाओ कम है :) मम्मी आई आम लायी ..आदि के मजे ही मजे हैं :)
June 9, 2009 at 11:34 PM
Kitna khelte ho beta? kabhi pani se kabhi mobile se to kabhi mummy se.. :)
kabhi padhai bhi kar liya karo..
June 10, 2009 at 12:01 AM
यार आदि..तू नहा और गर्मी मे खूब नहा..पर यार तू हमारे मजे क्युं लेता है?
तेरे को मालूम है कि मुम्बई जैसे अल्फ़ांसो आम कहीं नही मिल सकते..अब तेरा ये डिब्बा देखकर हमारे मुंह मे पानी आरहा है..बता क्या करें?:)
रामराम.
June 10, 2009 at 12:52 AM
बहुत दिनों बाद देखा बेटा आज वही भोली सी मुस्कान और शरारत ने दिल खुश कर दिया.....
love ya
June 10, 2009 at 3:37 AM
क्या प्यारे, तुम्हारे लिये मम्मी आम लाती हैं और हमसे हमारी मम्मी आम मंगवाती हैं!
June 10, 2009 at 4:19 AM
अरे एयर पोर्ट की ट्राली का बहुत अच्छा सदुपयोग किया ! वाह ..,.........
June 10, 2009 at 5:22 AM
आम तो हमें भी खिलाओ भई. अकेले खाना अच्छी बात नहीं है.
और हाँ, पानी में बार बार थोड़े न खेलते हैं. जब नहाने जाते है बस तब. बाकी समय दूसरी चीजों से खेलो.
अब तो मम्मी आ गई-अब तो मजे ही मजे!! :)
June 10, 2009 at 5:48 AM
लो पीड़ी अंकल तो अभी से पढाने के चक्कर में पड़ गए :) अभी तो बिलकुल मत सुनना खेलो खूब खेलो :)
June 10, 2009 at 6:11 AM
मम्मी के इंतज़ार में भी मजे कर लिए...आदि तुम हो गज़ब के...अब अकेले आम भी खाओगे...अकेले ही खाने थे तो डिब्बा दिखाने की क्या जरूरत थी? चीटिंग है ये तो...
नीरज
June 10, 2009 at 6:42 AM
वाह! वाह!
मन प्रसन्न हो गया. ऐसे ही बन-ठन के रहा करो.
June 10, 2009 at 8:34 AM
दोस्त आम के कम्पटीशन में तो तुम मुझे पछाड़ ही दोगे इस साल .
June 10, 2009 at 9:25 AM
हापुस आम खाने वालों की बात ही कुछ और है!
जाती सीजन में कुछ दिन और छक कर आम खाए जाएँ.
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