कल मेरे खिलौने निकालते हुऐ मम्मी मे ये प्ले हाऊस निकाला... और इससे बनी एक प्यारी सी ’हट’... पर मेरी नजर ’हट’ पर कम इसके डिब्बे पर ज्यादा थी...
और जैसे ही मौका मिला मैं इस डिब्बे को लेकर रफुचक्कर होने की कोशिश करने लगा...
हालाकिं इसकी साईज मुझसे डबल है, पर क्या फर्क पड़ता है.. ताकत तो मुझमें ज्यादा है न
ये देखो!! है न मुझसे बड़ा? और जरा एक नज़र पिछे लगी दिवार घड़ी पर डालो.. सही पहचाना आपने १० बजे हैं... पर ये दिन के नहीं रात के दस बजे है!!! हा हा हा..
और इसे ले जाकर क्या किया.. आप देखिये...
ये प्यारी सी ’हट’ (फोटो में दिख रही है रेड कलर कि) रितु आंटी लाई थी मेरे लिये.. मेरा जन्म दिन का उपहार..
थेंक्यु रितु आंटी!!
June 18, 2009 at 2:01 AM
बहुत शरारती होते जा रहे हो बेटा, चलिये ममी पापा को भी एक सुंदर सा खिलोना मिला है.
बहुत बहुत प्यार
June 18, 2009 at 3:42 AM
बहोत अच्छा ..........प्यारा सा नतखत सा आप हो ...
June 18, 2009 at 3:46 AM
छोटी उम्र, बडे इरादे।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
June 18, 2009 at 4:26 AM
इरादे बुलन्द है आदि जी के :) लगे रहो दिन हो या रात शरारतों में क्यों कि फिर यह दिन नहीं वापस आने वाले :)
June 18, 2009 at 4:51 AM
तुम तो गत्ते से ही खुश हो प्यारे। अन्दर वाला गेम हमें ही दे दो! :)
June 18, 2009 at 5:11 AM
सोये नहीं हट के अंदर..थक गये होगे, आराम कर लो. :)
June 18, 2009 at 5:39 AM
अरे वाह ! ऐसे ही खूब शैतानियाँ करा करो , बड़ा मजा आता है तुम्हे शेतानियाँ करके और हमें फोटो देखकर |
June 18, 2009 at 6:55 AM
शाबाश, one should think big.
June 18, 2009 at 10:00 AM
o le beta ji .....koi nahin samjh raha ! aapko to "gatte" se khelne me maja aa raha hai , hai naa ! aur "ghar ghar "khelne ke liye abhi mummy papa ko kahti hoon...theek hai !
chalo papa mummy mere bete ke sang "ghar ghar "khelo tab dekho aadi kitana khush hota hai . aur haan reetu aunty ko bhi bulana aur hame batana ki kaisa laga :)
June 18, 2009 at 11:34 AM
हट का क्या करोगे? अंकल को दे दो :)
June 18, 2009 at 5:53 PM
बहादुरी से लिए खड़ा।
आदि छोटा,डिब्बा बड़ा।
June 19, 2009 at 1:53 AM
vah bete.. bahut khoob.. :)
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