शरारत ऑफ द डे वाशबेसिन जाता तो हाथ धोने हूँ पर वहाँ से कभी खाली हाथ नहीं लैटता.. कभी टुथ ब्रश, कभी टंग क्लिनर या कंघा जो मिल जाये.. परसो लम्बा हाथ मारा और टुथ पेस्ट उठाकर ले आया.. पापा वापस लेने चाह रहे थे तो ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया.. फिर पापा क्या कर सकते थे.. अपनी तस्ल्ली के लिये उसका ढ़क्कन टाइट बंद कर मुझे पकड़ा दिया.. क्या उनको पता नहीं कि अब मैं बड़ा हो गया हूँ? मैने भी मौका पाकर उसका ढक्कन निकाल लिया और फर्श को अच्छे से मंजन करा दिया.. फिर तो टुथपेस्ट मेरे से छिनना ही था..:) |
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आदित्य - मुरमुरे खालो मुरमुरे
मुरमुरे बहुत पसन्द है.. खा भी सकते है और खेल भी सकते हैं.. देखे इस चित्रकथा में.. आप भी खा सकते हैं
June 26, 2009 at 4:54 AM
तुम्हारी शरारतों का जवाब नहीं
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मिलिए अखरोट खाने वाले डायनासोर से
June 26, 2009 at 5:22 AM
विक्की भईया तो इतना बड़ा मूँह खुले हैं कि कटोरी ही खिला देते. :)
फर्श तो बिल्कुल चमक गया होगा पेस्ट करके. शाबास!
June 26, 2009 at 7:09 AM
छा गया आदि..लगा रह बेटा फ़िर अकाध साल बाद तो स्कूल जाना ही है..करले मस्ती..ये दिन कभी नही आयेंगे.. तबियत से लगा रह.:) यार मुरमुरे हमको भी खिला यार...
रामराम.
June 26, 2009 at 11:44 AM
आदि, आपने फर्श को भी पेस्ट करा दिया :)
June 26, 2009 at 7:09 PM
शाबास ! अंकल जी खुश हुए :)
June 26, 2009 at 7:39 PM
ओ भैये ....
June 26, 2009 at 8:52 PM
आदि की शरारतें लुभावनी हैं।
शुभाशीर्वाद।
June 26, 2009 at 9:19 PM
वाह मुरमुरे देख कर तो मुंह मे पानी आ गया।
June 27, 2009 at 2:58 AM
खाओ और खेलो। मुरमुरे पर लेख बाद में लिखने होंगे!
June 27, 2009 at 2:58 AM
अओ मेरी टिपण्णी भी कुरमुरे के संग खा गया, यार जल्दी कर कल के तेरे कुरमुरे नही खत्म हुये, चल जल्दी से कुछ ओर ले कर आ
June 27, 2009 at 3:21 AM
आदि बेटा।
जरा ध्यान से-
मुरमुरों के लालच में कहीं
उँगली मत चबा लेना।
June 27, 2009 at 3:26 AM
bade maze kar rahe ho beta ji...yu hi lage raho...
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