यार आदि हमको भी चलाने दे ना? कितना आनन्द आता होगा यार तेरे को?
भाई हमको बचपन की यही एक मात्र याद है इसी तरह की साईकिल चलाते हुये, कमरे मे रखी मेज के कोने से सर टकरा गया था, सर मे आज भी सामने निशान है. बेटा थोडा सावधानी बरतना.
कहीं तू भी ताऊ मत बन जाना.:) पहले से चेता दिया है.
बढ़िया है इस तरह धकेलने में एक फायदा है दो चार साल बाद जब आपकी छोटी बहन आयेगी तो उसे साइकिल में बिठा कर इसी तरह घुमा सकोगे। वैसे एक जगह गुस्सा करते दिखे आप, गुस्से में बड़े सुन्दर लगते हो आप। :)
May 24, 2009 at 7:17 PM
मस्त!! कोई सामान साईकिल से टकरवा के तोड़े नहीं..फिर क्या मजा आयेगा. :)
May 24, 2009 at 7:25 PM
वाह!! ब्लागिंग के माध्यम से हमलोगों ने भी आपकी बाल लीलाओं का आनंद ले लिया।
May 24, 2009 at 9:44 PM
सोने की साइकिल चांदी की सीट..
May 24, 2009 at 10:09 PM
मजा आ रहा है क्यों? हमें तो देख कर ही आ गया
May 24, 2009 at 11:29 PM
यार आदि हमको भी चलाने दे ना? कितना आनन्द आता होगा यार तेरे को?
भाई हमको बचपन की यही एक मात्र याद है इसी तरह की साईकिल चलाते हुये, कमरे मे रखी मेज के कोने से सर टकरा गया था, सर मे आज भी सामने निशान है. बेटा थोडा सावधानी बरतना.
कहीं तू भी ताऊ मत बन जाना.:) पहले से चेता दिया है.
रामराम.
May 25, 2009 at 12:14 AM
वाह आदि.
May 25, 2009 at 1:20 AM
खूब ऐश करो अभी मौका है दो साल बाद तो तुम्हे धकेल दिया जाएगा पढाई नाम के जंजाल में
May 25, 2009 at 4:40 AM
ताऊ, अब आपको ढुढना मुश्किल नहीं होगा.. आपने आज निशानी बता दी..
राम राम
May 25, 2009 at 7:31 AM
बढ़िया है इस तरह धकेलने में एक फायदा है दो चार साल बाद जब आपकी छोटी बहन आयेगी तो उसे साइकिल में बिठा कर इसी तरह घुमा सकोगे।
वैसे एक जगह गुस्सा करते दिखे आप, गुस्से में बड़े सुन्दर लगते हो आप।
:)
May 25, 2009 at 8:28 AM
पीछे चलने की ट्रेनिंग अभी से लेने की क्या जरूरत है प्यारे! उसके लिये तो पूरी जिन्दगी पड़ी है!
May 25, 2009 at 10:40 AM
bhai waah !!
May 25, 2009 at 11:05 AM
नयनाभिराम!
मनभावन!
May 25, 2009 at 7:32 PM
शाबाश आदित्य।
आज धकिया रहे हो।
कल चलाना भी सीख ही जाओगे।
शुभ-आशीर्वाद।
May 26, 2009 at 5:36 AM
भोत बढ़िया साइकिल चलानी आवे भाई थाने म्हाने भी चलावन दयो नी कई देर
थारो बडो भाई
अजय कुमार सोनी
परलीका
9460102521
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