दोपहर में बॉल से खेलते-खेलते मैं भी उसी कमरे में पहुँच गया.. थोड़ी देर बाद सब ढुढते हुऐ कमरे में आये तो मैं ऐसे पकड़ा गया..
ये आँखों की चमक देख रहे हो? नया गिफ्ट मिला है न?
ऐसे चलाऊंगा...
न न... मु्झे ऐसे साइकिल हाँकता देख मासी ने कहा "इसका कवर हटा दो..." और मैं सवार हो गया साइकिल पर...
इसमें सीट बेल्ट है और फुट रेस्ट भी...
खैर असली मजा आया तीन की सुबह जब ये साइकिल औपचारिक रुप से मेरे हवाले हो गई... और इसमें बजता है गाना "मौजा ही मौजा...." और शुरु हो जाता है मेरा डाँस... और इसमें नगाडे़ वाला गाना भी है....
कैसी लगी मेरी साइकिल?
जरा पंसद तो बताओ?
थेंक्यु अनामिका मासी
May 8, 2009 at 9:44 PM
किसी को पीछे भी बिठा लेते हीरो..
May 8, 2009 at 9:56 PM
सचमुच हीरो लग रहे हो भई !!
May 9, 2009 at 12:23 AM
ैआदि अब नैनो की बारी है अच्छे भाग रहे हो आशीर्वाद्
May 9, 2009 at 2:53 AM
kya baat hai.....
oh ho......
cycle aur uske upar wala dono..
mast lag rahe hain....
congratulations....
enjoy with ur new cycle......
kabhi man kare toh mujhe bhi betha kar le jana.....
May 9, 2009 at 4:04 AM
हमें भी ऐसी दुपहिया साइकल लेनी है गाना बजाने वाली।
कहां से मिलेगी प्यारे?!
May 9, 2009 at 6:10 AM
अभी से साइकिल के रंग में रँग जाओ,
कभी मौका मिले, तो हमें भी बिठाओ!
May 9, 2009 at 7:06 AM
अरे यार पल्टू , हमको भी चलाने दे ना तेरी साईकिल..बहुत सुंदर लग रही है और गाने वाली साईकिल? वाह यार पल्टू आपके तो मजे हैं. लिये जाओ भाई.
और हां पल्टू ला तेरा कान इधर कर, चुपके से तेरे को याद दिला दूं, कल मदर्स डे है. जरा मम्मी को विश कर देना. नही तो फ़िर कहेगा कि ताऊ ने याद नही दिलाया था. और साईकिल चलाने मे भूल मत जाना.
रामराम.
May 9, 2009 at 7:43 AM
साईकिल संभाल के चलाना बेटा
May 9, 2009 at 8:18 AM
aare waah nayi cycle bahut mubarak ho aadi.bahut sunder hai.
May 9, 2009 at 2:14 PM
वाकई, यह तो मौजा ही मौजा हो गया. नाचते नाचते साईकिल चलेगी अब तो. :)
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