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शाम को पापा ऑफिस से आते है तो मैं अपनी पढाई शुरु कर देता हूँ.. किताब के पन्ने पलटना, उसमें रंग बिरंगे चित्र देखना मुझे खुब भाता है.. और तो और उसमे कुछ कार्ड भी है... कार्ड बाहर निकाल उनसे खेलना भी पसंद है..
किताब पर लिखा है कि इससे मैं हाथों और आंखो का सामजस्य सिखुंगा...
और एसा नहीं कि ये एक बार ही पढी़ है... ये देखिये दुसरे-तीसरे दिन के चित्र भी...
अभी कार्ड पहचाना और जगह पर लगाना नहीं आया है पन्ने अच्छे से बदल लेता हूँ..
और कुछ नहीं तो ये किताब १०-१५ मिनिट तो मुझे एक जगह बैठा सकती है, उससे ज्यादा नहीं.. इतनी पढाई बहुत है न मेरे लिये?
थेंक्यु रा्जीव अंकल!!
May 19, 2009 at 1:37 AM
बहुत शाबास आदि..अब तो पढाई भी शुरु करदी. बधाई पहली किताब पढने के लिये.
रामराम.
May 19, 2009 at 2:04 AM
किताब सबसे अच्छा दोस्त होती है!
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किताब से दोस्ती करोगे,
तो अपने आपको
कभी अकेला नहीं पाओगे!
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तुम्हारी ये तस्वीरें देखकर
तो यही लग रहा है कि
बहुत बड़े पढ़ाकू निकलोगे!
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May 19, 2009 at 2:22 AM
vah beta abhi se itani padhai ye to badi achhi bat hai badhai
May 19, 2009 at 3:17 AM
Dekho, kitab phatne na paaye.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
May 19, 2009 at 4:13 AM
अभी से १५ मिनट पढ़ाई-मेरिट में आओगे पक्का!! शाबास!!
May 19, 2009 at 4:19 AM
Dear Adi,
Keep it up. I am very happy to see that you are using my gifted book. Books are one's best friends. One who keeps company of books never gets bored in life.
Luv,
Rajeev Uncle
May 19, 2009 at 5:22 AM
शाबाश ! बहुत अच्छे ! लगे रहो !
May 19, 2009 at 9:17 AM
देखो प्यारे धीरे धीरे पढ़ाई नामक चीज में फंसाया जा रहा है। बच के रहना!
May 19, 2009 at 10:53 AM
आप तो जबर्दस्त पढ़ाकू हो गए। किताब देने वाले अंकल बहुत समझदार हैं। आपको सबसे अच्छाd दोस्त दे दिया।
घुघूती बासूती
May 19, 2009 at 2:34 PM
अमां खां तुम तो अबी से पढ़ाकू लग रिये हो :)
May 19, 2009 at 9:35 PM
वाह भाई ...गिफ्ट तो बहुत सही है
सीखो सीखो
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
May 19, 2009 at 10:54 PM
gyaan ji ne theek khaa hai jab tak ho isse bachke rahna
May 20, 2009 at 12:47 AM
अभी से किताबें....नहीं नहीं...अभी तो खेलो खाओ...बड़े हो कर किताबें ही तो पढ़नी है...वैसे पढ़ते तुम बहुत ध्यान से हो...जीवन में बहुत आगे जाओगे इसमें कोई शक नहीं...
नीरज
May 20, 2009 at 1:23 AM
बुरी आदत है इसे बदल डालो....
May 20, 2009 at 11:54 PM
चलो बेटू लाल कि दोस्ती किताब से तो हो गई.. :)
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