गाडोले और साईकिल के बारे में तो आपको बता ही चुका हूँ.. रावेन्द्र अंकल साईकिल पर बिठाने की बात कर रहे थे.. छोटी सी साईकिल पर तो दो लोग नहीं बैठ सकते न? तो फिर मैने अपने गिफ्ट देखे, उसमें मिली ये प्यारी सी कार.. स्टेरिंग और पों पों वाले हार्न के साथ..
ऐसे बजता है ये होर्न.. पों पों..
ये है आरुशी दीदी, अपने पापा के साथ.. दीदी लाई है ये गाड़ी मेरे लिये...

वैसे अभी ये गाड़ी चलानी मुझे आई नही है पर रावेन्द्र अंकल आप तो आ जाओ दिल्ली, इसी गाड़ी में घुमेगें...
थेंक्यु आरुशी दीदी!!
May 28, 2009 at 7:02 PM
मैं आऊँ? अट जाऊँगा क्या?
आरुषि दीदी ने तो बहुत अच्छी कार दी है, खूब चलाओ पों पों करते. :)
May 28, 2009 at 10:04 PM
आदि भाई की मोटर चली पम पम पम ...इंडिया गेट जायेंगे आइस क्रीम खाएँगे ..अच्छी अच्छी सूरतों से .न न अभी वो काम बाद में ..:) अभी तो मोटर चलाओ पम पम पम ....और आरुषि दीदी को थेंकु बोलते रहो :)
May 28, 2009 at 10:13 PM
ले भाई ताऊ भी आगया तेरी पौं पौं मे बैठने.:)
रामराम.
May 29, 2009 at 12:39 AM
हमारा नंबर कब आएगा गाडी पर बैठने का...???
नीरज दादा
May 29, 2009 at 1:05 AM
ओए पलटू साहब अब तो गाडी वाले हो गये हो यार, कभी कभी हमे भी सेर करवाया करोगे क्या, चलो अगली बार जब भी भारत आया मै सिर्फ़ तुम्हारी गाडी मै ही घुमुगां, बेटा बहुत प्यारी लगी आप की यह पॊं पों मोटर.
अकंल ओर आरुषि बीटिया को धन्यवाद जरुर बोलना.
प्यार
May 29, 2009 at 1:19 AM
अरे वाह ! क्या मस्त गाड़ी है , हम भी लाइन में आदि तेरी इस पों पों की सवारी करने के लिए |
May 29, 2009 at 2:08 AM
जो वादा किया,
वो निभाना पड़ेगा!
आदि ने बुलाया,
अब तो आना पड़ेगा!
पहले ज़रा बातें ये बताइए -
कहाँ-कहाँ हमको घुमाओगे?
किसको-किसको हम से मिलाओगे?
क्या-क्या चीज़ें साथ-साथ खाओगे?
कैसी-कैसी बातियाँ बनाओगे?
तरस रहे हैं ये सब भी तो,
किसे-किसे साथ में बिठाओगे?
किसकी-किसकी ठोंक-ठोंककर,
किस-किस से ठुँकवाओगे?
गाड़ी तो चलानी अभी आई ना,
अंकल से ही गाड़ी क्या चलवाओगे?
और करेंगे हम क्या?
May 29, 2009 at 2:13 AM
बेटा लिफ्ट मिलेगी क्या :)
May 29, 2009 at 6:42 AM
किराया विराया तो तय करो प्यारे। या फ्री में सबको सैर कराओगे!
May 29, 2009 at 8:13 AM
sahi hai bete mauj lo
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