अरे मम्मी मुंबई आयी हुईं हैं तो तुम क्यूँ नहीं आये???...हम को भी कितना मजा आता तुमसे मिलकर और तुम्हारे बाल बना कर...चलो कोई बात नहीं अगली बार सही... नीरज
बिलकुल मन भैया पर गए हो। वो भी कंघी लेकर बाल बनाता है। मन तो सूसू करने के बाद पौंछा लेने के लिए भी जाता है और लगाता भी है। बच्चों को अपने काम करने की आदत डालना वाकई काबिलेतारीफ है। बधाई.
May 31, 2009 at 11:02 PM
अरे मम्मी मुंबई आयी हुईं हैं तो तुम क्यूँ नहीं आये???...हम को भी कितना मजा आता तुमसे मिलकर और तुम्हारे बाल बना कर...चलो कोई बात नहीं अगली बार सही...
नीरज
May 31, 2009 at 11:11 PM
वाह आदि बेटा बड़ा सयाना हो गया है :) बधाई
May 31, 2009 at 11:14 PM
कितने आम खाए न तुमने आदि ,अब हर जगह आम ही आम नजर आ रहे हैं तुम्हे :) चलो अपना काम खुद करो और आम हमें खिलाओ :)
May 31, 2009 at 11:43 PM
वाह बेटा अब तो बडे अच्छे बच्छे बन गये हो सब कुछ सीख लो नहीं तो बडे हो कर बीवी से पिटोगे
May 31, 2009 at 11:59 PM
अदि बेटे की प्यारी मुस्कान से खिला हुआ ब्लॉग कई और शतक पूरे करे...ढेरों शुभकामनाएँ
June 1, 2009 at 1:00 AM
वाह मास्टर ब्लास्टर, अभी ऒर कइ शतक लगाने हॆ. वॆसे ही बहोत होशियार हो गये हो, कीप इट अप
June 1, 2009 at 4:26 AM
कपिला जी की बात को आगे बढ़ाते हुए -
चोटी बनाना जरूर सीख लो,
जीवन-भर काम आएगा!
इन बालों का क्या है -
कल हों न हों?
June 1, 2009 at 4:35 AM
अरे वाह ! आदि बेटा तो बड़ा सयाना हो गया अब अपने काम खुद कर स्वावलंबी बन रहा है !
June 1, 2009 at 4:50 AM
कितने जिम्मेदार और समझदार हो गये हो, बालक!!
पापा क्या कर रहे हैं आखिर ..उनसे करवाओ सब काम कि बस, फोटो खिंचना काम रह गया है. :)
June 1, 2009 at 5:38 AM
बच्चे छोटे से कामों से,
सीख बड़ों को दे जाते हैं।
अल्प-अवस्था में करतब,
ये बड़े-बड़े दिखलाते हैं।
आदि बहुत है लगता प्यारा,
यह सबकी आँखों का तारा।
दर्पण देखो माँग निकालो,
अपने काम स्वयं कर डालो।
June 1, 2009 at 6:55 AM
लगे रहो ..नन्हे ....कोई तेल वेळ नहीं लगाते क्या ?
June 1, 2009 at 6:58 AM
डॉ अंकल, तेल लगाने से दुसरे डॉ अंकल ने मना किया है, बोला इससे डेड्रफ हो जायेगा.. आप कोई आईडीया दो न प्लीज़...
June 1, 2009 at 7:05 AM
शाबास आदि बेटा, अब कपड़े बदलना भी सीक लो जल्दी से।
June 1, 2009 at 9:26 AM
shararat agar masoom ho to bahut pyaari cheez hai
June 1, 2009 at 9:47 AM
भूल सुधार :
बा = बना
June 1, 2009 at 9:47 AM
आदि दो शतक लगाने की बहुत बधाई और अगले जन्म दिन तक ५०० पूरी करने के लिये अग्रिम बधाई.
बाल बडे सुंदर बा लेते हो यार? कहां सीखे?:)
रामराम.
June 1, 2009 at 6:58 PM
बहुत बढ़िया अपना काम खुद ही करना चाहिए .
June 1, 2009 at 9:01 PM
बिलकुल मन भैया पर गए हो। वो भी कंघी लेकर बाल बनाता है। मन तो सूसू करने के बाद पौंछा लेने के लिए भी जाता है और लगाता भी है। बच्चों को अपने काम करने की आदत डालना वाकई काबिलेतारीफ है। बधाई.
June 3, 2009 at 3:47 AM
mere sar par baal nahi hai, kabhi mera baal bana kar dikhao tab janoo.. :D
June 3, 2009 at 6:46 AM
Mamma miss you very much betu...love you...be independedent. i proud of you..
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