क्या-क्या पहचानता हूँ मैं?
बोलता तो नहीं हूँ पर पहचानना सीख रहा हूँ मैं.. अपने सीधे हाथ तर्जनी से इशारा कर बता सकता हूँ... पता है सबसे अच्छे से क्या पहचानता हूँ में? "आदि को".. हाँ खुद को खुब जानता हूँ मैं.. पुछो जरा "आदि कहाँ है?" तुरंत अपने सीने पर इशारा कर देता हूँ.. खुद को पहचानने के बाद सबसे अच्छे से जानता हूँ पंखे को.... पुछो कि "फैन कहाँ है?".. मेरी गर्दन तुरंत छत की और हो जाती है और अंगुली ऊपर.. पापा को भी पहचानता हूँ मैं और मम्मी को भी.. कबुतर भी मेरी पहचान सकता हूँ और केट भी.. हाँ मेरे एक सीपर पर केट बनी है.. सीपर गोल-गोल घुमा कर केट खोज ही लेता हूँ..
मेरे लिये तो ये सिख है, पर पापा के लिये खेल.. थोडी़ थोड़ी देर में पुछते रहते है.."आदि ये कहाँ है, आदि वो कहाँ है?".. जब मुड़ होता है तो बता देता हूँ नहीं तो...... गर्दन हिला न कर देता हूँ...
पता है आजकल दिल्ली का मौसम बदल रहा है, और मैं बदलते मौसम की चपेट में आ गया.. और कुछ नहीं थोड़ा सा वायरल हो गया.. डॉ अंकल ने कहा है कि चार दिन में ठीक हो जाऊंगा.. दो-तीन दिन तो हो गये...बस अब एक दो दिन की बार और है...


April 8, 2009 at 8:47 PM
ओह ओह बेटा जी को बुखार हो गया , अभी क्लास लगाते हैं उसकी छु मंतर हो जायेगा ओके ऐसे कैसे आदि को परेशान करने चला आया......हमे तो आदि हँसता खेलता और मुस्कुराता ही चाहिए हमेशा बस .....अच्छा ये बताओ आदि कौन है हा हा हा हा हा हा हा हा हा यहाँ तो ब्लॉग पर छोटे छोटे बहुत सारे आदि है अब किसकी तरफ इशारा करोगे हीरो हाँ चलो जल्दी से ठीक हो जाओ फिर ढेर सारी मस्ती ओके....
Love ya
April 8, 2009 at 9:25 PM
Bahut sahi..sikhte chalo. :)
April 8, 2009 at 9:35 PM
oh beta jaldi se acche ho jao.....love u...
April 8, 2009 at 9:45 PM
vah bhi adi ab to roz hi tumse milna padega ab tum pehchaanne lag gaye ho agar kabhi 2 miloongi to bhool jaya karoge aur kya kya seekh rahe ho? shubhkaamnayen
April 8, 2009 at 10:36 PM
बुखार को जल्दी से दूर भगाओ...बहुत सारी नयी बाते सीखो :)
April 8, 2009 at 10:55 PM
ध्यान रखो नन्हे .वायरल में लिक्वीड डाईट थोडा बढा देते है.....
April 8, 2009 at 11:17 PM
aare aadi ko bukhar ho gaya,jaldi jaldi thik ho jao,aur haa doc anurag uncle baat dhyan rakh na,ye bahut achha ,aap chize pehchan rahe ho,aise hi sikha karein,jaldi thik ho jaye:)
April 8, 2009 at 11:43 PM
accha game hain,khelo aur sikho bhi
April 8, 2009 at 11:52 PM
जितना हम उन्हें समझते हैं- वे उससे कहीं अधिक जानते हैं- ऐसा आपको कई बार महसूस होगा और अचरज में डाल देगा।
April 9, 2009 at 1:04 AM
बस ऐसे ही लगे रहो धीरे-धीरे सब कुछ जान जाओगे | और बुखार वैगेरह तो आते रहते है जल्दी ही ठीक हो जाओगे | फिर खूब खेलना |
April 9, 2009 at 2:48 AM
यार आदि, अब तेरी तबियत तो टःईक हो गई होगी, पर यार ये तू आराम क्या स्विमिंग पूल मे कर रहा है? :)
कहीं इसी से तो वायरल नही आगया?
रामराम.
April 9, 2009 at 2:58 AM
कल बहुत नहाए थे न ... इसलिए बुखार आ गया है ... और क्या क्या पहचानते हो बेटे ... मुझे पहचान पाओगे ?
April 9, 2009 at 4:31 AM
ज्यादा नहाना गलत बात! तुम्हारे मम्मी-पापा को पता नहीं क्या?! :)
April 9, 2009 at 5:43 AM
चलो अपना ख्याल रखना आगे से ...
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