चाची के टीका लगाने के बाद चाचा का नम्बर था, चाचा दूर कहां जा रहे हो?
शाम को हल्दी की रस्म हुई. मैं भी तैयार था, चाचा को हल्दी लगाने के लिये
मजा आया हरिये (मुंग) बिखेरने वाली रस्म में... ये काम तो मैं बहुत अच्छे से कर सकता हूँ.. और बीच बीच में हरिये खाने को भी मिल जाते है.
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ये सब के बाद देर शाम को संगीत का कार्यक्रम हुआ.. मैं भी सज धज कर पहुच गया संगीत का मजा लेने, स्टेज पर तो मौका नही मिला पर संगीत बहुत एंजोय किया..
अब आप मिलिये चाचा-चाची से...
सुबह से इतने काम कर मैं तो बहुत थक गया, मैं चला सोने... देखो कैसे मेरे बिस्तर का इंतजाम हुआ है..
कल मिलते है, आगे के हाल के साथ..
April 26, 2009 at 7:37 PM
बहुत जोरदार हाल चाल बताया यार पल्टू जी आपने शादी का तो. पर ये क्या आप तो कमेंट्री करते २ बीच मे ही सो गये?:)
रामराम.
April 26, 2009 at 9:09 PM
हीरो बहुत सुंदर लग रहे हो हर तस्वीर मे और लगता है सारी जिम्मेवारी आदी पर ही थी ...नन्ही सी जान और इतना काम है न ...और चाचा चाची को ढेर सारा आशीर्वाद ."
love ya
April 27, 2009 at 1:38 AM
बहुत गजब लग रहे हो, नीले कुर्ते में..हमें तो शक है कि शादी के लिए कोई तुम्हें भी पसंद कर गया होगा.
बहुत मस्त पोस्ट है. फोटो देखकर और पोस्ट पढ़कर बहुत आनंद आया.
April 27, 2009 at 2:33 AM
एक से एक धांसू कुर्ते बनवाये हो भई..हमें तो लगा कि तुम्हारी ही शादी है. :)
बहुत प्यारे लग रहे हो..फोटो से पूरी कहानी कह दी.
April 27, 2009 at 3:44 AM
aare waah aadi bahut pyare lag rahe ho aap,shandar kurte:),sunder photo,chacha chachi ko bahut badhai.
April 27, 2009 at 7:39 AM
इत्ता काम करते हो तो नींद तो कस कर आयेगी ही। अब तुम न होते तो यह शादी भला कैसे होती!
April 27, 2009 at 9:48 AM
अरे वाह !! मतलब खूब मस्ती करके लौटे हो शादी से..
April 27, 2009 at 11:27 PM
to khoob masti hui shadi mein..
April 28, 2009 at 5:42 PM
पल्टू जी "हल्दी की रस्म" आपने सजीव कर दी।
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