बुखार है तो क्या... दवा पीते ही बुखार छु मंतर हो जाता है, फिर पता नहीं चलता कि बुखार है कि नहीं..मंगलवार शाम को डॉ अंकल को दिखा कर घर आये, दवा पी.. और शुरु हो गया अपनी गाड़ी (गाडोले) के साथ... एक हाथ में थैला ले कर.. और कुछ शब्द नहीं ये तस्विरें खुद बोल रही हैं..
तो आजकल चलने का शौक चर्राया है जनाब को... गाडोला, कुर्सी हो, टेबल हो या स्टूल बस पकड़ कर चलने लगता हूँ...
बुखार अब ठीक है, कल दिन भर ठीक रहा.. आपका प्यार जो मिलता है...






April 9, 2009 at 8:12 PM
थोड़ा आराम कर लो बाबू-जल्दी बुखार उतरेगा. सब्जी खरीदने पापा चले जायेंगे, उसकी चिन्ता छोड़ कर झोला रख दो किनारे. :)
April 9, 2009 at 8:27 PM
ओये हीरो देखा ना बुखार छु मन्त्र हो गया न .......और आदि तो थैला लेकर चलता भी बना....नन्हे नन्हे कदम रख कर...वीर तुम बडे चलो हा हा हा हा हा है ना बेटा जी....
Love ya..
April 9, 2009 at 9:43 PM
अरे वाह अब तो आदि घर के काम भी करने लगा है. माँ का प्यारा बेटा बहुत ही अच्छा हैं. लेकिन जरा देख कर, जरा सी लापरवाही से वायरल फिर से आ जाता है....
April 9, 2009 at 9:43 PM
aare wah bukhar utar gaya,ye badi achhi baat huyi:)thoda aaram karle aur:)kuch din.
April 9, 2009 at 9:53 PM
आदि ये क्या कर रहे हो अभी कल तो बीमार थे तुम्हारा ये क्या केहते हैं इसे जिस के सहारे तुम चल रहे हो? ये हमारे जमाने मे हुआ करता था हमे भी बचपन की याद दिला दी ये कहां से लाये ?
April 9, 2009 at 10:34 PM
हाय कैसे मम्मी पापा हैं - सारा काम तुमसे कराते हैं। :)
April 9, 2009 at 10:42 PM
उप्स्स्स्स्स नन्ही सी जान और इतना सारा काम :) गाडी बहुत बढ़िया है आपकी ..क्या लेने जा रहे हो आप बाजार से :)
April 9, 2009 at 11:40 PM
अच्छा तो चाचा की शादी की शोपिंग करने जा रहे हो.. :) बुखार से डरते नहीं हो.. अछि बात है
April 10, 2009 at 12:47 AM
यार आदि तू गाडी लेके मार्केट ही गया होगा ..मुझे तो तेरा थैला (शापिंग बैग) दिखा तू मेरे लिये क्या लाया?:)
रामराम.
April 10, 2009 at 1:26 AM
कितनी मेहनत कर रहे हो ... थोडा आराम भी कर लो।
April 10, 2009 at 2:51 AM
ओ भैये ज़रा संभल कर
April 10, 2009 at 5:10 AM
"आप ने बचपन याद दिला दिया जब गुडले चलाया करते थे। यही उन दिनों का बैबी वाकर था।"
(on facebook)
April 10, 2009 at 8:06 PM
वाह, अब तो तुम गाडोले की मकेनिकी भी कर लेते हो..शाबाश..आगे चलकर अपनी गाड़ी की देखभाल में बहुत मदद मिलेगी. बुखार को जल्दी से, जोर की एक किक दो.
April 10, 2009 at 10:18 PM
vaah aadi, tumhara gondola dekh kar to mujhe bhi apna bachpan yaad aa gaya, aajkal to ye kahin nazar hi nahin aata.
magar bukhar thik hone ke baad thoda aaram to kar lo nahin to fir se aa jaayega.
April 10, 2009 at 10:55 PM
अरे वाह, चलने के लिए पापा ने अच्छी गाड़ी दिलाई है। मैं तो अपने बेटे को ये वाली गाड़ी तो दिलाना भूल ही गया। अब वो दो साल का हो गया है।
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